स्वच्छ भारत मिशन में लगे संविदा कार्मिक तनख्वाह की बाट जोह रहे हैं। ना केवल उदयपुर बल्कि प्रदेश के अनेक जिले ऐसे हैं, जहां कुछ माह से तनख्वाह नहीं मिली है। ऐसे में ये संविदा कार्मिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन में लगे संविदा कार्मिक तनख्वाह की बाट जोह रहे हैं। ना केवल उदयपुर बल्कि प्रदेश के अनेक जिले ऐसे हैं, जहां कुछ माह से तनख्वाह नहीं मिली है। ऐसे में ये संविदा कार्मिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) भारत सरकार का बड़ा प्रोजेक्ट हैं। इसके तहत प्रदेश में तीन सौ के करीब संविदा कार्मिक मिशन की व्यवस्थाएं संभाले हुए हैं, लेकिन काफी समय से तनख्वाह नहीं मिलने के कारण परेशानियों से जूझ रहे हैं।
जबकि पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त रवि जैन ने जुलाई माह में आदेश जारी कर 15वें वित्त आयोग में टाइड फण्ड के तहत जिला परिषदों को आवंटित कुल अनुदान राशि में से दस प्रतिशत राशि एसबीएम में कार्यरत कार्मिकों के मानदेय देने के लिए आदेश जारी किए थे। यही नहीं भारत सरकार ने भी मार्च 2023 में ये आदेश जारी किया था, लेकिन बजट नहीं होने के कारण कार्मिकों का भुगतान नहीं हुआ। ऐसे में संविदा कार्मिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक में निर्णय, भुगतान नहीं
जानकारी के अनुसार अगस्त 2023 में पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव व आयुक्त ने बैठक ली थी। इसमें एसबीएम से संबंधित जिला एवं ब्लॉक स्तर के संविदाकार्मिकों को 15वें वित्त आयोग से मानदेय देने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सरकार से पैसा लिया, जिलों को नहीं दिया
जानकारी के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के तहत सरकार ने राशि जारी की। इस पर ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग निदेशालय ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के अन्तर्गत 2 करोड़ रु़पए की राशि आवंटित की, लेकिन इस राशि का जिलों में हस्तांतरण नहीं किया। राशि को प्रशासनिक मद में खुद के लिए आवंटित करवा लिया।
आर्थिक तंगी झेल रहे स्वच्छता वीर, तनख्वाह के पड़ रहे लाले
गांवों के विकास की धुरी कही जाने वाली जिला परिषद के हालात ऐसे हैं कि इनके पास 15वें वित्त आयोग में बजट नहीं है। वजह ये बताई जा रही है कि केन्द्र सरकार की ओर से फण्ड ट्रांसफर नहीं किया गया। ऐसे में गांवों के विकास को लेकर बनने वाले प्लान पर ब्रेक लग गया। जिला परिषद स्तर पर प्लान तो बनाया जा चुका है, लेकिन बजट जारी नहीं नहीं होने से गांवों में विकास कार्य रुके हुए हैं।
इन जिलों के कार्मिकों को तनख्वाह का इंतजार
जानकारी के अनुसार बारां में अक्टूबर 22, झालावाड़ में जनवरी 23, नागौर में फरवरी 23, सिरोही में अप्रेल 23, हनुमानगढ़, बूंदी में अगस्त-सितंबर, बाड़मेर में मार्च 23, उदयपुर में जून 23, डूंगरपुर में अगस्त-सितंबर, झुंझुनूं में अप्रेल 23 से तनख्वाह नहीं मिल पाई है।