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मेवल में शिव-पार्वती पूजा आराधना के साथ गवरी खेल शुरू

सराड़ी, मैथूडी में रमी गवरी, सवा माह तक गांवों में होगा आयोजन

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मेवल में शिव-पार्वती पूजा आराधना के साथ गवरी खेल शुरू

मेवल में शिव-पार्वती पूजा आराधना के साथ गवरी खेल शुरू

40 दिन तक भील समाज के लोग जो गवरी के किरदार में रहते हैं
गींगला (उदयपुर). गवरी का नाम सुनते ही मस्ती और आनंद की बयार चलती है, मगर इस गवरी नृत्यानुष्ठान का नाम ही अपने आप में एक साथ एक साधना है। 40 दिन तक भील समाज के लोग जो गवरी के किरदार में रहते हैं वे परिवार से दूर, हरी सब्जी पर प्रतिबंध, पैरों में जूते नहीं पहनना, एक समय भोजन जैसे कठिन कामों से पवित्रता को सौंप देते हैं। गवरी खेलने के दौरान गांव से यह लाखों रुपए के जेवर और परिधान उधार लेते हैं। सजने संवरने के लिए लेकिन कभी भी इनका ईमान नहीं डगमगाता। गवरी में राई और बुढि़या की भूमिका को विशेष महत्व दिया जाता है। भादो माह में जब काले घने बादलों की गर्जना व थाली मांदल की थाप जैसे कोई आकाश की हरकत से नया त्यौहार रचा है। मगर इस बार कोरोना के तांडव ने वर्षों की साधना को खंडित किया है। गवरी नृत्य के मुख्य खेल मीणा- बंजारा, हटिया- दाढ़मां ,कालका माता, कान्ह- गुजरी, हटीया- दाणी, चोर- बाणीया, देवी- अंबा, कंजर, खेतुड़ी व बादशाह की सवारी जैसे कई खेल आकर्षक रहते हैं।
सराडी स्थित एकलव्यनगर माताजी चौक में मंगलवार को गवरी नृत्य हुआ गवरी का मुख्य कलाकार शंकर भील ने अच्छी बरसात, कोरोना जैसी महामारी की विदाई की कामना को लेकर गवरी नृत्य किया गया, सभी कलाकार सराड़ी एकलव्य नगर के थे। गवरी के साथ बारिश ने भी रंगमंच को भिगोया तथा कलाकारों ने बादशाह बंजारा, वरजू, हटिया, व काना-गुजरी के खेलों में हंसी ठिठोली कर दर्शकों को बांधे रखा। आसपास के सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ रही। इधर मैथूडी चौराहे पर भी अन्य कलाकारों द्वारा गवरी खेल खेला गया। परम्परागत के अलावा अब आधुनिक बोल व रीतियों पर आधारित नाटक का भी मंचन करते है।
गवरी मंचन देखने उमड़ी भीड़
झाड़ोल. उपखण्ड क्षेत्र के गोराणा गांव में मंगलवार को गवरी का आयोजन किया गया। गवरी के मुख्य किरदारों एवं कलाकारों में सरपंच कन्हैयालाल कटेरिया भी अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। मंगलवार को गोराणा के मुख्य चौराहे पर दिन-रात गवरी का आयोजन हुआ। जिसमें कलाकारों द्वारा कोराना से सावधानी, कोराना के अधिक से अधिक टीके लगवाने समेत अन्य कई नाटंकों के माध्यम से जागरूता का सन्देश दिया। इसके अलावा कान्हा-गुर्जरी, बणजारा , चोर-पुलिस, समेत नाटक किये।


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