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बच्चों की बीमारियाें, चर्म रोग व संक्रमण रोग के उपचार में होम्योपैथी कारगर

- गांवों में उपचार के लिए प्रदेश में केवल दो मोबाइल यूनिट जयपुर व उदयपुर में - सरकारी स्तर पर जिले में 12 चिकित्सक, निजी प्रेक्टिशनर्स मिलाकर 150 डॉक्टर

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गांवों में उपचार के लिए प्रदेश में केवल दो मोबाइल यूनिट जयपुर व उदयपुर में

गांवों में उपचार के लिए प्रदेश में केवल दो मोबाइल यूनिट जयपुर व उदयपुर में

कोविड- 19 के संक्रमण के बाद हर्बल दवाओं में आयुर्वेद की तरह ही लोगों को स्वस्थ करने में होम्योपैथी बेहद लाभकारी साबित हुई है। वर्तमान में महिलाओं में होने वाली बीमारियों से लेकर एलर्जी, गुर्दे की पथरी, बच्चों की बीमारियां, चर्म रोग व संक्रमण फैलाने वाली बीमारियों के उपचार में होम्योपैथी ने नया मुकाम हासिल किया है। होम्योपैथी चिकित्सकों की संख्या के लिहाज से हम जयपुर, जोधपुर के बाद तीसरे स्थान पर हैं। हमारी मोबाइल यूनिट ने गांवों में बीते छह वर्ष से शिविर लगाकर नई उपचार की नई लहर शुरू की है, जिससे हजारों की संख्या में रोगी लाभान्वित हुए हैं।

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प्रतिमाह गांवों में 16 शिविर: गांवों मे प्रतिमाह 16 शिविर मोबाइल यूनिट के माध्यम से लगाए जा रहे हैं। हर शिविर में करीब 500 से 800 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। यह कार्य सरकारी स्तर पर बीते छह माह से किया जा रहा है।

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विश्व होम्यौपैथी दिवस:विश्व होम्योपैथी दिवस दुनियाभर में प्रति वर्ष 10 अप्रेल को होम्योपैथी के संस्थापक जर्मनी के डॉ. क्रिश्चिन फ्रेडरिक सैमुएल हैनीमेन के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। इस बार डॉ हैनीमेन की 268 वी जयंती मनाई जा रही है, होम्योपैथी भारत में सबसे लोकप्रिय चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। वास्तव में, आयुष (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) सेवाओं के बीच में इसका दूसरा स्थान है।

भारत में आयुष प्रणालियों की तुलना में होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 के तहत भारत में एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा प्रणाली है।

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देश में इसकी स्वर्ण जयन्ती:

देश में होम्योपैथी में संगठित अनुसंधान के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत सरकार ने 1963 में होम्योपैथिक अनुसंधान समिति का गठन किया, जिसने होम्योपैथिक दवाओं को एक महत्वपूर्ण अनुसंधान क्षेत्र के रूप में सिद्ध करने के तरीकों और साधनों की पहचान की। 1969 में सरकार ने इन प्रणालियों में व्यवस्थित अनुसंधान करने के लिए भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी प्रणाली में केंद्रीय अनुसंधान परिषद का गठन किया। इसे बाद में भंग कर दिया गया और प्रत्येक चिकित्सा प्रणाली के लिए अलग-अलग अनुसंधान परिषदों का गठन किया गया ।1978 में सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी का गठन हुआ। देश में 187 से अधिक होम्योपैथिक कॉलेज, लगभग 9000 सरकारी क्लीनिक और 307 अस्पताल हैं। जिनमें लगभग 3,00,000 से अधिक योग्य होम्योपैथ हैं।

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उदयपुर में होम्योपैथीउदयपुर में एक होम्योपैथिक कॉलेज एवं चिकित्सालय है। ज़िले में 7 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय संचालित हैं। एक राजकीय होम्योपैथिक मोबाइल यूनिट है। सरकारी 12 और प्राइवेट प्रेक्टिशनर्स मिलाकर 150 चिकित्सक हैं। तीन डिस्पेंसरी शहर में, गांवों में चार डिस्पेंसरी हैं।

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राजस्थान में कुल 12 होम्योपैथिक कॉलेज हैं। जिनमें 2 राजकीय महाविद्यालय हैं। 254 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय हैं एवं क़रीब 8000 रजिस्टर्ड होमियोपैथिक चिकित्सक हैं। इसमें दवाइयां हर्बल होने से साइड इफैक्ट नहीं होते हैं। अब होम्योपैथी उपचार बढ़ता जा रहा है।डॉ. हारून रशीद, वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी एवं होम्योपैथिक नोडल अधिकारी


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