बलीचा में बने नए कैम्पस में सोमवार से होगी पढ़ाई, देश का सबसे बड़ा और सुंदर कैम्पस होगा
मोहनलाल सुखाडि़या परिसर में चल रहे भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) का शनिवार को वहां आखिरी दिन होगा। इसके बाद सोमवार से आईआईएम-यू अपने बलीचा स्थित नए भवन में शिफ्ट हो जाएगा। संस्थान के जिम्मेदारों की मानें तो यह भवन देश का सबसे बड़ा और सुंदर परिसर होगा। वर्ष 2013 से सुखाडि़या परिसर में चल रहे संस्थान के विद्यार्थी और शिक्षक तीन साल की स्मृतियों को चिर स्थाई बनाने के लिए शनिवार को अंतिम और स्पेशल स्वीट मैमोरी क्लास लगाएंगे। इसके बाद यह भवन सिंगापुर के सहयोग से छह अक्टूबर से खुलने जा रहे सेंटर फोर एक्सीलेंस ट्यूरिज्म ट्रेनिंग (सीईटीटी) का हो जाएगा।
300 एकड़ में फैला नया आईआईएम
बलीचा में बना आईआईएम परिसर 300 एकड़ में फैला है। कैंपस से पहाड़ और जंगल के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं। एकेडिमक भवन और हॉस्टल निर्माण के कार्य पूरे हो चुके हैं। शेष कार्यों का निर्माण जारी है। यहां कर्मचारियों के लिए निर्माणाधीन हाउस विंग का निर्माण कार्य भी जल्द पूरा होने की उम्मीद है।
बहुत कुछ है खास
कैम्पस की कुल जमीन 300 एकड़
भू-जल स्तर बढ़ाने 20 तालाब
पूरे प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 330 करोड़
अब तक खर्च हुआ 200 करोड़
ईंट की जगह पत्थर से बने हैं हॉस्टल
ये गर्मी में सामान्य भवनों की अपेक्षा रहेंगे ठंडे
ग्रीन कैम्पस होगा मुख्य आकर्षण
आईआईएम-यू का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ग्रीन कैंपस यहां का सबसे प्रमुख आकर्षण होगा। प्रबंधन के विद्यार्थी पर्यावरण के लिए भी कार्य करेंगे। यह प्रदेश का पहला शैक्षणिक संस्थान होगा, जहां वेस्टेज ट्रीटमेंट किया जाएगा। संस्थान की यह पहल पर्यावरण की दिशा में लोगों को जागरूक बनाएगी।
नए परिसर में जाने को लेकर सभी उत्साहित हैं। उम्मीद और आशा करते हैं कि यह देश का बेहतर संस्थान साबित होगा। सुखाडि़या विश्वविद्यालय से मिले सहयोग के साथ ही जिला प्रशासन और यूआईटी के भी आभारी रहेंगे।
- प्रो. जनत शाह निदेशक, आईआईएम-यू