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“ग्लोबल डिजिटल हेल्थ पार्टनरशिप” के तहत एक प्लेटफार्म पर आए विश्व

जी-20 में भारत का बड़ा प्रयास दुनिया के बड़े देशों के सामने प्रमुखता से स्वास्थ्य का मु्ददा रखेगा भारत डिजिटलाइजेशन के लिए जरूरी तकनीक उपलब्ध कराने का देगा भरोसा

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अभिषेक श्रीवास्तव

उदयपुर. जी-20 की पहली बार अध्यक्षता और मेजबानी कर रहा भारत डिजिटल इकॉनॉमी के अलावा कई मोर्चे पर विश्व को एक जाजम पर लाने की तैयारी कर रहा है। फूड सिक्योरिटी, वूमेन लेड इम्पावरमेंट और ग्रीन एनर्जी पर चर्चाओं के बीच स्वास्थ्य का मुद्दा भारत ने प्रमुखता से उठाया है। प्रयास है कि विश्व के सभी देश डिजिटलाइज हेल्थ सिस्टम की ओर बढ़ें, ताकि सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ करोड़ों लोगों को मिल सके।
दरसअल, कोविड-19 के बाद बदले परिदृश्य ने स्वास्थ्य के सेक्टर में सोचने के लिए सभी देशों को विवश कर दिया है। कई देशों ने भारत से इस क्षेत्र में आगे आने की अपील की है। कोविड के दौरान मिली चुनौतियों को देखते हुए भारत ने डिजिटलाइज हेल्थ सिस्टम पर काम किया। उसमें आए अच्छे परिणामों को देखते हुए अब सभी देशों को "ग्लोबल डिजिटल हेल्थ पार्टनरशिप" के तहत एक मंच पर ऑनलाइन जोड़ने का प्रयास भारत करेगा। इसके लिए जी-20 समिट के तहत होने वाली बैठकों में इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा जाएगा। साथ ही इसका मसौदा भी संबंधित देशों को सौंपा जाएगा।

वर्तमान में यह हैं चुनौतिया:
दरअसल, कई देशों में भी सस्ता, सुलभ और गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाएं बेहद मुश्किल हैं। अफ्रीकन देशों में यह बड़ी समस्या है। हेल्थ से रिलेटेड डाटा की एक्सेसबिलिटी भी देशों के बीच में नहीं है। मेडिकल सर्टिफिकेट से लेकर मेडिसीन तक में एक राय नहीं है। यूरोपियन इंश्योरेंस कंपनिया भारत को अपने दायरे में नहीं लातीं। इसके कारण सस्ता इलाज होने के बावजूद करोड़ों लोग उससे वंचित रह जाते हैं। देशों का अपना नेशनल हेल्थ सिस्टम है, जो आपस में सामंजस्य नहीं बैठा पाता। जेनरिक और पेटेंट को लेकर भी एकमतता नहीं है। लार्ज स्केल मेडिसीन डिलेवरी भी बड़ी चुनौती है।


यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लिए यह करेगा इंडिया:
भारत में करोड़ों लोग हेल्थ केयर के दायर में आते हैं। इसको दुनिया के सामने रखा जाएगा। डिजिटल हेल्थ पार्टनरशिप को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों के हेल्थ सिस्टम को एक दूसरे कनेक्ट कराने का प्रयास करेगा। पेशेंट डाटा की डिजिटली एक्सेसबिलिटी की कोशिश करेगा, ताकि संबंधित रोगों के विषय आसानी से कहीं से भी डाटा मिल सके। मरीज अफोर्डेबल रेट पर डिजिटल हेल्थ पार्टनरशिप के तहत किसी भी देश के चिकित्सक से बात कर सकेगा। मेडिसीन की जरूरत के हिसाब से इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट किया जा सकेगा। इसका डाटा ऑनलाइन होगा।

बिटकॉइन को विश्व में कैसे मिले मान्यता, इस पर भी होगी फाइनेंस ट्रैक में चर्चा:
जी-20 के तहत होने वाली फाइनेंस ट्रैक की बैठक में बिटकॉइन और क्रिप्टो करेंसी से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुखता से उठेगा। इसकी मान्यता को लेकर जी-20 के देश आपस में चर्चा कर सकते हैं। हाला

जिओ पॉलिटिक्स के कारण ही एनर्जी सिक्योरिटी और खाद्य सुरक्षा जैसी समस्याएं:
जी-20 में कई देश जिओ पॉलिटिक्स, फूड सिक्योरिटी और एनर्जी सिक्योरिटी को बड़ा मुद्दा मानकर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में भारत इन समस्याओं पर भी जी-20 प्रेसिडेंसी में गंभीरता से बात होगी। दरअसल, जिओ पॉलिटिक्स के कारण ही कई देशों में खाद्य संकट और एनर्जी संकट पैदा हुआ है। फूड सिक्योरिटी के लिए भारत का प्रयास हो कि इसे भी डिजिटलाइज किया जाए, ताकि विश्व का डाटा एक स्थान पर उपलब्ध और कमी और उपलब्धता के आधार पर आदान-प्रदान हो सके। इसके अलावा फार्मिंग का रियल टाइम डाटा भी होना चाहिए।