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इसलिए चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड के प्रति विद्यार्थियों का रुझान कम…पढ़ें पूरी खबर

प्रदेश के शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में दो वर्षीय बीएड और चार वर्षीय इंटीग्रेटेड में प्रवेश प्रक्रिया का पहला दौर समाप्त हो चुका है। पंजीयन शुल्क भरकर प्रथम वरीयता में सम्मिलित विद्यार्थियों की ओर से शेष फीस भरे जाने के बाद संबंधित कॉलेज में प्रवेश का चरण पूरा हो चुका है।

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इसलिए चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड के प्रति विद्यार्थियों का रुझान कम...पढ़ें पूरी खबर

इसलिए चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड के प्रति विद्यार्थियों का रुझान कम...पढ़ें पूरी खबर

मधुसूदन शर्मा

उदयपुर. प्रदेश के शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में दो वर्षीय बीएड और चार वर्षीय इंटीग्रेटेड में प्रवेश प्रक्रिया का पहला दौर समाप्त हो चुका है। पंजीयन शुल्क भरकर प्रथम वरीयता में सम्मिलित विद्यार्थियों की ओर से शेष फीस भरे जाने के बाद संबंधित कॉलेज में प्रवेश का चरण पूरा हो चुका है। इस प्रवेश प्रक्रिया में खास बात ये सामने आ रही है कि दो वर्ष की तुलना में चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड के प्रति विद्यार्थियों का रुझान कम नजर आ रहा है। प्रक्रिया के तहत आवंटित महाविद्यालय में उपिस्थति दे चुके विद्यार्थियों ने अपवर्ड मूवमेंट भरे हैं। उनके नए कॉलेज का आवंटन सोमवार देर रात ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। ऐसे में सूची में सभी विद्यार्थियों की कॉलेज बदलने की आस है। अपवर्ड के बाद जिन विद्यार्थियों के कॉलेज में परिवर्तन होगा, उन्हें नए आवंटित महाविद्यालय में दस्तावेजों के साथ कॉलेज में उपिस्थति देना अनिवार्य होगा। सेकण्ड मेरिट लिस्ट भी खाली: प्रवेश के लिए सेकण्ड मेरिट लिस्ट भी निकाली गई थी। उसकी तिथि शनिवार तक निर्धारित की गई थी लेकिन विद्यार्थियों ने इसमें भी कोई रुझान नहीं दिखाया है। इसके बावजूद सीटें खाली रह गई है। अब तिथि बढ़ाने का निर्णय राज्य स्तर पर किया जाएगा।

सीट खाली रहने की संभावना
नोडल अधिकारी डॉ. नरेंद्र पानेरी ने बताया कि चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड में प्रवेश के रुझान एवं कॉलेज ज्वाइन करने वालों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में ये सीटें खाली रह सकती है। चार वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्सेस में अपवर्ड विद्यार्थी नए आवंटित कॉलेज में प्रवेश लेंगे। प्रथम काउंसङ्क्षलग में कॉलेज ज्वाइन नहीं करने वाले व बिना कॉलेज आवंटन हुए विद्यार्थियों को अवसर दिया रहा है। कुल सीटों के विरुद्ध कम सीट भरने पर नए सिरे से पंजीयन और शेष प्रक्रिया जारी की जाएगी।

ये भी है एक प्रमुख कारण
इसका कारण राजस्थान से सटा मध्यप्रदेश बताया जा रहा है। विद्यार्थी डीएलएड करने के लिए मध्यप्रदेश में लेवल प्रथम के लिए आवेदन करता है। यहां उन्हें जाने की जरूरत नहीं पड़ती। विद्यार्थी यहां से डीएलएड करना उचित समझते हैं। ऐसे में राजस्थान में सीटें खाली रह जाती है। बता दें कि मध्यप्रदेश की डिग्री को राजस्थान में मान्यता दी हुई है, इसलिए विद्यार्थी यहां से करना उचित समझते हैं।
यह है अद्यतन स्थिति
दो वर्षीय बीएड
107330 सीट््स
140235 पंजीयन
88022 फीस भर चुके
86774 कॉलेज ज्वाइन
1248 वंचित
24400 अपवर्ड भरने वाले
चार वर्षीय बीएससी बीएड
20975 सीट््स
14367 पंजीयन
10838 फीस भर चुके
10745 कॉलेज ज्वाइन
93 वंचित
2059 अपवर्ड भरने वाले
चार वर्षीय बीए बीएड
23025 सीट््स
20388 पंजीयन
13538 फीस भर चुके
13418 कॉलेज ज्वाइन
120 वंचित
2638 अपवर्ड भरने वाले
कुल
151330 सीट््स
174990 पंजीयन
112398 फीस भर चुके
110937 कॉलेज ज्वाइन
1461 वंचित
29097 अपवर्ड भरने वाले

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