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उदयपुर। संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल चिकित्सालय की आवश्यक सेवाओं में शामिल तथा बाजार से सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने वाला 'लाइफ लाइन दवाघरÓ प्रशासन की उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। अव्यवस्था के चलते ही आपातकालीन सेवा वार्ड के सामने केबिन में संचालित इस दवाघर की पहचान वर्तमान में टेम्पो स्टेण्ड कार्यालय के तौर पर हो रही है। यहां सामने खड़े रहने वाले टेम्पोओं से मरीज परेशान हो रहे हैं, लेकिन चिकित्सालय प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। चिकित्सालय प्रशासन तीन माह पहले लाइफ लाइन दवाघर के सामने से टेम्पो पार्किंग हटाने का वादा प्रदेश के गृहमंत्री से लिखित में कर चुका है, बावजूद इसके हालात जस के तस बने हुए हैं।
बिकती ही नहीं दवाएं
एमबी चिकित्सालय परिसर में लाइफ लाइन दवाघर के ठीक सामने टेम्पो स्टेण्ड का बोर्ड लगा हुआ है। इसके चलते दवाघर के ठीक सामने टेम्पो कतार में खड़े रहते हैं। इस कारण आउटडोर से बाहर निकलने वाले मरीज एवं उनके परिजनों को यह दवाघर बिल्कुल नहीं दिखता है। एेसे में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना काउंटर पर अनुपलब्ध दवाओं के लिए मरीजों को चिकित्सालय के बाहर संचालित मेडिकल स्टोर की ओर रुख करना पड़ता है। यहां लाइफ लाइन की अपेक्षा महंगी मिलने वाली दवाओं से मरीजों की जेब कटती है। चिकित्सालय परिसर में संचालित इस दवाघर का फायदा मरीजों तक पहुंचाने और अस्पताल की सुविधाओं को बढ़ाने का अधिकार प्रशासनिक अमले के पास होने के बावजूद वह कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
गृहमंत्री की भी चिंता नहीं
गौरतलब है कि जुलाई 2015 को एमबी चिकित्सालय अधीक्षक ने गृहमंत्री गुलाब चंद्र कटारिया को भेजे गए कुछ सवालों के जवाब में स्पष्ट किया था कि इमरजेंसी के सामने स्थित लाइफ लाइन ड्रग स्टोर के सामने बने टेम्पो स्टेण्ड से यहां आने वाले मरीजों को तकलीफें हो रही हैं। इसके मद्देनजर टेम्पो स्टेण्ड को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कार्रवाई जारी है। पर इतना समय बीत जाने के बावजूद भी हालात जस के तस हैं।
जारी हैं प्रयास
हमारी ओर से व्यवस्था सुधार को लेकर प्रयास नियमित जारी हैं।
तरुण गुप्ता, अधीक्षक, एमबी चिकित्सालय
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