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उदयपुर में भी हैं अमरनाथ, केदारनाथ और पशुपतिनाथ मंदिर

अनोखे हैं उदयपुर के कई शिव मंदिर, हर शिवरात्रि पर दर्शनों के लिए उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

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उदयपुर. अमरनाथ मंदिर और केदारनाथ मंदिर के बारे में आपने सुना ही होगा। एक को भक्त ‘बाबा बर्फानी’ के नाम से और दूसरे को ‘केदार बाबा’ व अन्य कई नामों से जानते हैं। दोनों ही हिमालय की गोद में स्थित हैं। ये देश के प्रसिद्ध शिवधाम हैं। वहीं, नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर भी लोगों की आस्था का केंद्र है। लेकि न, आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि उदयपुर में भी अमरनाथ, केदारनाथ और पशुपतिनाथ मंदिर हैं। उदयपुर
का अमरनाथ जहां गुप्तेश्वर महादेव मंदिर को कहा जाता है तो वहीं, केदारनाथ मंदिर शहर के उंदरी में और पशुपतिनाथ मंदिर झल्लारा में है।


उदयपुर का अमरनाथ : गुप्तेश्वर महादेव मंदिर
तितरड़ी स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। यहां महादेव एक गुफा में विराजमान हैं और उनके दर्शन करने के लिए भक्तों को भी उस गुफा में होकर जाना पड़ता है। शायद यही कारण है कि इसे ‘उदयपुर का अमरनाथ’ कहा जाने लगा। कहा जाता है कि गुरू बृजबिहारी बन ने गुप्तेश्वर महादेव की पहाड़ी के अंदर प्राकृतिक गुफा में तपस्या की थी और उन्हें ही यहां शिवलिंग होने का सपना आया था। तब इन पहाडिय़ों की गुफा में खोज करने पर उन्हें यहां शिवलिंग मिला और उन्होंने यहीं तपस्या शुरू की। इसके बाद यह मंदिर गुफा में होने के कारण गुप्तेश्वर महादेव और धीरे-धीरे उदयपुर के अमरनाथ के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

उंदरी गांव का केदारनाथ मंदिर :
नाई स्थित उंदरी गांव में केदारनाथ मंदिर सभी गांववासियों की आस्था का केंद्र है। ये बहुत प्राचीन मंदिर है। यहां हर शिवरात्रि पर मेला लगता है, जो इस बार कोरोना के कारण नहीं लग पाएगा। केदारनाथ मंदिर यहां पहाड़ी पर स्थित है और यहां दूर-दूर से भक्त दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। इस मंदिर के आसपास के क्षेत्र में ही अमरख महादेव समेत 11 महादेव मंदिर हैं, ऐसे में ग्रामीण इन्हें 12 ज्योतिर्लिंग ही मानते हैं। गांववासियों के अनुसार, इसी कारण पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर का नाम केदारनाथ रखा गया।


धोलागढ़ में पशुपतिनाथ मंदिर: विश्व का सबसे ऊंचा पशुपतिनाथ शिवलिंग
झल्लारा पंचायत समिति के धोलागिर खेड़ा ग्राम पंचायत के केनर में स्थित धौलागढ़ पर्वत की तलहटी में ‘विश्व के सबसे ऊंचे’ अष्टमुखी पशुपतिनाथ शिवलिंग है। गत वर्ष शिवरात्रि पर शिवलिंग की स्थापना की गई थी। यह विश्व के सबसे ऊंचे अष्टमुखी शिवलिंग बताए जाते हैं। शिवलिंग की ऊंचाई करीब सवा नौ फीट है। इससे पहले मध्यप्रदेश के मंदसौर में स्थापित पशुपतिनाथ शिवलिंग की ऊंचाई करीब सवा सात फीट है, वहीं नेपाल में स्थापित प्रतिमा 5.5 है। धोलागढ़ स्थित इस अष्टमुखी शिवलिंग की खासियत यह है कि आठ रूप शिव, आठ अवस्था में हैं, जिसमें चार रूप ऊपर तो चार रूप नीचे हैं।

उदयपुर के ये शिव मंदिर भी हैं अनूठे

कमलनाथ महादेव: यहां रावण ने की थी पूजाझाड़ोल का प्रमुख कमलनाथ महोदव मंदिर आवरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित है और इस मन्दिर की कई लोक मान्यताएं हैं। किंवदंती के अनुसार यहां त्रेतायुग में लंकापति रावण ने स्थापित शिव प्रतिमा को प्रसन्न करने के लिए कमल पुष्प अर्पित किए थे । महादेव ने एक कमल पुष्प चुरा लिया था बाद में रावण ने अपने कमलनयन आंख रूपी पुष्प सहित पूरे 108 पुष्प मंत्रोच्चारण के साथ चढ़ाए तो महादेव रावण की पूजा से प्रसन्न हुए । बताते हैं कि उसी दिन से इस शिवधाम का नाम कमलनाथ महादेव नाम से विख्यात हुआ ।

मेनार के मृदेश्वर महादेव : मेनार में ब्रह्म सागर तालाब की पाल पर 68 फीट की विशाल मृदेश्वर महादेव की प्रतिमा स्थापित है। ये शिव प्रतिमा उदयपुर क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे मेनार के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र है। शिव के सम्मुख विशाल तालाब है । ग्रामीणों का मानना है कि जब से यह शिव प्रतिमा बनी है तब से यह तालाब कभी खाली नहीं हुआ है। इस विशाल शिवप्रतिमा के निर्माण का सपना देखा मेनार के समाज सेवी प्रभु लाल जोशी ने और गांव के बुज़ुर्गों व युवाओं के प्रयासों व सहयोग से 2008 में साकार हुआ।

लूणदा के केरेश्वर महादेव

धरियावद प्रतापगढ़ जाने वाले मार्ग पर लूणदा ग्राम के दक्षिण पश्चिम भाग में केरेश्वर महादेव का यह मंदिर स्थापत्य कला के मर्मज्ञ महाराणा कुंभा द्वारा निर्मित प्राचीन शिवालय है। इसका निर्माण 1435 से 1450 ईस्वी के मध्य का है। महाराणा कुंभा गुजरात विजय कर जब मेड़ता नगरी चित्तौडगढ़़़ की तरफ लौट रहे थे तब उन्होंने इस स्थल की अलौकिक महिमा से प्रभावित हो शिवालय का निर्माण करवाया था। गर्भगृह में भूरे पाषाण का (भूरवर्णी) विशाल शिवलिंग है।