
हर वर्ष दीपावली आते ही चारों ओर खाद्य सुरक्षा की चर्चा शुरू हो जाती है। बाजार में तैयार होने वाली ढेरों मिठाइयों में से कौन सा खरा है और कौन सा नहीं, यह जानना जरूरी है, लेकिन प्रदेश में खाद्य सुरक्षा के नाम पर नमूनों का बंटाधार हो रहा है।

महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में जो लैबोरेट्री है, वह खस्ताहाल है। हालात इतने खराब हैं कि यह लैब नियमों पर ही खरी नहीं उतर रही। माइक्रो बायोलॉजी लैब में नियमानुसार धूल-मिट्टी नहीं जानी चाहिए, सीलन भी नहीं हो। मगर यहां लैब की दीवारें तडक़ी हुई है और उन पर सीलन आ रही है।

खाद्य सुरक्षा में नमूनों की जांच के लिए प्रदेश में कहने को 11 लैब हैं, जबकि छह ही कार्यरत हैं। छह पुरानी लैब जयपुर, अलवर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और अजमेर में हैं। वर्ष 2016-17 में पांच नई लैब के भवन तैयार हो गए परन्तु वहां न तो स्टाफ लगा है और ना ही काम शुरू हो पाया है। इसमें बांसवाड़ा, चूरू, बीकानेर, जालौर और भरतपुर शामिल हैं।

प्रदेश में वर्ष 1980 के बाद कनिष्ठ खाद्य विश्लेषक की भर्ती नहीं हुई। ऐसे में वे गिने-चुने रह गए हैं। हालांकि वर्ष 2013 में खाद्य विश्लेषकों की भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसमें से छह अभ्यर्थियों को लिया जाना था, लेकिन मामला न्यायालय में जाने के बाद भर्ती अटक गई। इसके बाद इसी वर्ष कुल 11 पदों पर भर्ती निकाली गई, परीक्षा हुई परन्तु अब तक किसी को नियुक्ति नहीं दी गई।

लैब के बरामदे से लेकर कई कक्षों की छत का पलस्तर जगह छोड़ चुका है। जहां नमूनों की जांच की जाती है, उस परिसर की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। हॉस्पिटल परिसर में इस लैब की बगल में मोर्चरी, पीछे कचरा स्टैण्ड तो एक ओर धोबी घाट है। ऐसे में नमूनों की जांच की परिकल्पना आसानी से की जा सकती है।

प्रदेश में केवल तीन मुख्य खाद्य विश्लेषक कार्य कर रहे हैं। ऐसे में रिपोर्ट की अवधि का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। नियमानुसार जब मुख्य खाद्य विश्लेषक आते हैं तो उनके हस्ताक्षरों के बाद ही नमूनों की जांच की जाती है।

हाल यह है कि जांच रिपोर्ट के इंतजार के बगैर ही लोग दीपावली पर बनी हर प्रकार की सही या गलत खाद्य सामग्री हलक से नीचे उतार देते हैं। 14 दिन में रिपोर्ट की अनिवार्यता के बावजूद महीनों तक इसका अता-पता नहीं होता है।

सूत्रों के अनुसार लैब के नए भवन के लिए 50 लाख रुपए जारी हो चुके हैं, लेकिन यह काम शुरू नहीं हो पाया। 22 से 28 अक्टूबर के बीच 94 नमूने जांच के लिए इस लैब में पहुंच चुके हैं, लेकिन एक की भी जांच नहीं हो पाई है। ये सभी नमूने फ्रीजर की शोभा बढ़ा रहे हैं।

उदयपुर और कोटा लैब देख रहे मुख्य खाद्य विश्लेषक पंकज मिड्डा ने बताया कि वह फिलहाल कोटा हैं। जयपुर और जोधपुर लैब का काम देख रहे करणसिंह ने बताया कि जो आदेश है, उसके हिसाब से काम कर रहा हूं। रिपोर्ट 14 दिन में नहीं दे सकते हैं, इसीलिए सरकार ने समय बढ़ाने के लिए भी कहा है।