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उदयपुर

Bird Village Menar News : वृंदावन में तब्दील हुआ मेनार, हर तरफ ठाकुर जी के जयकारे, हजारों श्रद्धालु साक्षी बने

426 साल बाद मेनार ठाकुर जी मंदिर पर स्वर्ण कलश के साथ ध्वजादंड स्थापना

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मेनार. जैसे ही रवि पुष्य योग मुहूर्त के समय की वेला नजदीक आ रही थी त्यों त्यों सूरज की किरणें पहाड़ी पर स्थित ठाकुर जी शिखर मंदिर पर चढ़ रही थी। वैसे ही भक्तों का रैला भी मंदिर की ओर उमड़ रहा था। यह मौका था सैकड़ों साल पुराने प्राचीन ठाकुर जी मंदिर के स्वर्ण कलश और ध्वजादंड स्थापना महोत्सव का।
मेवाड़ मालवा बाराबुंगावटी सहित सेंकड़ों गांवों से भक्तों का रैला शिखर मंदिर की तरफ उमड़ रहा था। पंडित अंबा लाल शर्मा के सानिध्य में पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार और ढोल नगाड़ों के साथ जजमानों द्वारा मधुश्यामजी की प्रतिमा और मंदिर पर स्थापित होने वाले स्वर्ण कलश और ध्वजादंड को हाथों में लिए नव कुंडीय यज्ञ शाला के परिक्रमा शुरू हुई। महाआरती महा भोग के साथ शिखर मंदिर पर स्वर्ण कलश की स्थापना हुई तो मेनार गांव ठाकुर जी जय जयकारों से गूंज उठा। 56 भोग मनोरथ के बाद 51 बंदूकों की सलामी के साथ तीनो कलश और ध्वजा दंड की स्थापना हुई। मंदिर से निकल रहे डोरे को हाथ लगाकर समस्त न्यात इस पावन मौके की सहभागी बनी।
श्रद्धा ऐसी कि रास्ते कम पड़ गए
कार्यक्रम की शुरुआत से ही ड्रोन से गुलाब के फूलों की बारिश आसमान से शुरू हुई जो स्थापना तक जारी रही। हजारों की तादाद में भक्तो की भीड़ सालों बाद आए इस अद्भुत क्षण को निहार रही थी। वहीं हर कोई इस ऐतिहासिक प्राचीन मंदिर पर स्वर्ण कलश का ये पल देखकर खुशी से भाव विभोर था। हर भक्त खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था। इस दौरान मेनार कृष्ण भक्ति में ऐसे रमा की यहां का मन भावन मथुरा और पग-पग वृंदावन में तब्दील हो गया । मंदिर के इर्द गिर्द भवनों पर ही सैकड़ो लोग मौजूद रहे। वहीं ओंकारेश्वर चौक मंदिर परिसर और पांचों मार्ग हजारों श्रद्धालुओ की भीड़ से अट गए।
हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा
पारंपरिक वेशभूषा में हर मार्ग पर चारों तरफ मेहमानों के स्वागत में ग्रामीणों ने पलक पांवड़े बिछा दिए। हर मेहमान को उपरणा ओढ़ाकर स्वागत सत्कार किया। इधर डबोक हवाई अड्डा से तीन बार उड़े हेलीकॉप्टर से ठाकुर जी मंदिर , मृदेश्वर महादेव शिव प्रतिमा और अंबा माता शक्तिपीठ पर पुष्प वर्षा हुई । इधर नव कुंडीय हवन में महाविष्णु याग यज्ञ की पूर्णाहुति हुई। महाप्रसादी अंबा माता पंचायती नोहरे में हुई जिसमे हजारों की तादाद में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी, राणा प्रताप संस्थान निदेशक गणपत लाल मेनारिया, आएलपी नेता उदय लाल डांगी, बीजेपी नेता हिम्मत सिंह झाला सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेतागण भी पहुंचे।
मांगलिक कार्यों का सौभाग्य इन्हें मिला
मुख्य कलश स्थापना : कन्हैया लाल ठाकरोत
ध्वजा दंड स्थापना : मांगी लाल लुणावत
मधुश्याम जी स्थापना व कलश : राधाकिशन भलावत
द्वितीय कलश : शांति लाल एकलिंगदासोत
तृतीय कलश : श्रीलाल रूपज्योत
महाआरती : शंकर लाल ठाकरोत
महाभोग : गैहरी लाल ठाकरोत
डोरा फेरना : पूर्णाशंकर जोशी
मुख्य यजमान व पूर्णाहुति : मांगी लाल सिंगावत
चंवर : देवीलाल लूणावत व छोगा लाल खेतावत
चंवर मधुश्याम जी : कालू गदावत व हेमेंद्र उदावत
श्रृंगार : ओंकार लाल भलावत
पुष्प वर्षा हेलीकॉप्टर : कौशल मेनारिया

राणा प्रताप के समय 1596 में ध्वजा चढ़ाई का उल्लेख
दो सरोवरों के मध्य स्थित नागर शैली में बने ठाकुर जी मन्दिर को बनने मे 97 साल लगे थे । 1325 में इस मंदिर के निर्माण का मुहुर्त हुआ और नींव रखी गई जो 97 साल बाद राणा लखा के समय पूर्ण हुआ था । मंदिर के ध्वजा चढ़ाई का उलेख प्राचीन समय के सूरह लेख पर मिलता है जिसमें सन 1596 में महाराणा प्रताप के समय ध्वजा चढ़ाने एवं समस्त न्यात के साक्षी रहने का उलेख मिलता है । जब ये मंदिर जर्जर हुआ तो ग्रामीणों ने जन सहयोग से 50 लाख रुपए खर्च कर जीणोZद्धार कराया जिसमें 7 साल लगे। इसके बाद अब 600 साल बाद स्वर्ण कलश की स्थापना हुई। 426 साल बाद ध्वजादंड स्थापना की गई जो इससे पूर्व 1596 में की गई थी । तब भी इसी भांति न्यात के साक्षी रहने का उल्लेख मिलता है ।