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उदयपुर के गोवर्धन विलास थाना क्षेत्र में हत्या की आशंका वाले मामले में पुलिस की अढाई चाल

- पुलिस की सुस्ती, ठोकरें खाने को मजबूर मां-बाप  

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उदयपुर . साहब! मेरे बच्चे की हत्या हुई है। उसे मारकर उसकी लाश को सडक़ किनारे फेंका गया है। मौका हालात भी इसी ओर इशारा कर रहे थे। मेरी बात का विश्वास करो। मेरा बच्चा दुर्घटना का शिकार नहीं हुआ बल्कि उसे कुछ खिलाकर बेसुध कर मारा गया है। घटना स्थल पर खून से लथपथ अखबार भी मिले थे, जिन्हें पुलिस ने जांच का हिस्सा नहीं बनाया।

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कुछ एेसी दर्द भरी कहानी लेकर रावजी का हाटा निवासी बुजुर्ग ईश्वरलाल लोहार और उनकी पत्नी गिर्वा वृत्ताधिकारी कार्यालय में पुलिस उपअधीक्षक ओम कुमार के समक्ष गिड़गिड़ाते रहे। बार-बार कहते दिखे कि साहब! बच्चे की मौत को लेकर करीब दो महीने हो गए हैं, लेकिन अब तक संदिग्ध आरोपित को बुलाकर पूछताछ करने में देरी की जा रही है। पुलिस उपअधीक्षक ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया। इससे पहले पीडि़त माता-पिता जिला पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन देकर भी अपना दु:ख बयां कर चुके हैं लेकिन अब तक मां-पिता की फरियाद को लेकर थानाधिकारी से लेकर उच्चाधिकारियों का कलेजा नहीं पसीजा है। गौरतलब है कि 17 अगस्त की रात गोवद्र्धन विलास थाना क्षेत्र स्थित बलीचा बायपास के किनारे से पुलिस ने प्रीतम लोहार का शव बरामद किया था। शव पर चोट के निशान एवं दुर्घटना स्थल पर खड़ी बाइक का हैण्डल लॉक दुर्घटना की बजाय हत्या की आशंकाओं को प्रबल कर रहे हैं।

संदिग्ध की तलाश

संदिग्ध युवक जो घटना की रात प्रीतम के साथ था। पेशे से वाहन चालक है, जिसकी लगातार तलाश की जा रही है। थाना पुलिस को उसकी स्थानीय उपस्थिति को लेकर पाबंद किया हुआ है। उससे पूछताछ कर पुलिस किसी नतीजे पर पहुंचेगी।

- ओम कुमार, पुलिस उप अधीक्षक, गिर्वा (उदयपुर)

आत्महत्या के मामले में आरोपित की जमानत खारिज

उदयपुर. ऊंची दर पर ब्याज राशि देने, धोखे में रखकर बेशकीमती भूखण्डों की रजिस्ट्री कराने एवं पीडि़त युवक को आत्महत्या के लिए विवश करने के मामले में आरोपित की ओर पेश जमानत अर्जी को अदालत ने खारिज कर दिया।

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इससे पहले धोली बावड़ी निवासी गोविंद कुमावत की ओर से अदालत में जमानत अर्जी पेश की गई थी। प्रकरण के अनुसार 19 अगस्त को फतहपुरा निवासी सूरज कुमार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जांच के दौरान सामने आया कि मृतक के नाम पर भुवाणा पटवार मंडल में 3 कीमती भूखण्ड थे। ऊंची दर पर ब्याज पर उधार देकर आरोपित कुमावत ने युवक को उधार राशि के बदले जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम कराने का खेल किया। यह कहते हुए कि राशि लौटाने पर वह संबंधित जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम करा देंगे। लेकिन बाद में आरोपित राशि लेकर रजिस्ट्री कराने से मुकर गए। मामले में आरोपित धीरज भादविया की ओर से पेश अग्रिम जमानत भी अदालत ने खारिज कर दी है, जबकि नीरज अग्रवाल अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।