
शक्ति को नमन..
शक्ति को नमन.. - ‘सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोस्तुते।’अर्थात: ‘तुम सृष्टि, पालन और संहार की शक्ति भूता, सनातनी देवी, गुणों का आधार तथा सर्वगुणमयी हो। नारायणि! तुम्हें नमस्कार है। ’उदयपुर. नवरात्र का आरंभ हो चुका है। नवरात्र यानी शक्ति की भक्ति का पर्व। मातृशक्ति के पूजन का पर्व। कोई इसे शक्ति अर्जन करने का सूत्र मानकर चलता है तो कोई भक्ति में लीन होने का। नौ दिन तक देवी के नौ स्वरूपों का पूजन किया जाता है। जिस तरह देवी कष्टों का हरण करती हैं, ठीक उसी प्रकार हमारे समाज में शक्तिस्वरूपा कई ऐसी नारियां हैं जिन्होंने अपनी भागीरथी प्रयासों से समाज को नई दिशा दी है। ऐसी ही महिलाओं को आपके सामने लेकर आ रहे हैं जिन्होंने अपने प्रयासों से परिदृश्य को बदला है। ये उल्लेखनीय है कि इनकी तुलना हम किसी देवी से नहीं कर रहे हैं, इन्हें प्रतीक मात्र के रूप में देखा जाए। इनमें से कुछ ने देश-दुनिया में नाम रोशन किया है तो कोई अपने कार्यों से इस समाज के लिए मिसाल बन गई हैं। हम यहां लेकसिटी की कुछ ऐसी ही नौ शक्तियों से रू-ब-रू करा रहे हैं।
सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को कर दिया खुद के पैरों पर खड़ा - पूर्णिमा सेनउदयपुर जिले के वल्लभनगर क्षेत्र स्थित करणपुर निवासी पूर्णिमा सेन ग्रामीण महिलाओं के लिए लक्ष्मी का वरदान बनकर उभरी है। 2006 में साथिन बनकर पूर्णिमा ने सबसे पहले बाल विवाह रोकथाम की दिशा में काम किया और महिलाओं को जागरुक कर अब तक 20 से ज्यादा बाल विवाह रुकवाए है। स्वयं 8वीं पास थी बाद में ओपन बोर्ड से 10वीं और 12वीं पास की और बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिलाते हुए कई बेटियों स्कूल से निकल कॉलेज तक पढऩे गई। किशोरियों के स्वास्थ्य पर काम करते हुए गरीब तबके की महिलाओं को आर्थिक सम्बल प्रदान करने के लिए गांव में 20 से ज्यादा स्वयं सहायता समूह खड़े किए। इसमें 300 से ज्यादा महिलाओं को हैण्डबेग, सिलाई और पशुपालन का काम सिखाया। समूह को लाखों के सरकारी ऋण दिलाए जिससे काम करते हुए आज प्रत्येक महिला 5 से 8 हजार प्रतिमाह कमाते हुए घर खर्च चला रही है। पूर्णिमा के इन कायो्र पर उन्हे कई मंचों पर सम्मानित किया गया है।
बेटियों को कराया शक्ति स्वरुपा का अहसास- कविता जोशीउदयपुर के शोभागपुरा पंचायत की युवा महिला कविता जोशी ने सरपंच बनते ही गांव में बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने का अभियान चलाया। इस अभियान से ग्रामीण बेटियां ही नहीं कई महिलाएं भी घूंघट से बाहर आईं और वे खुद शक्ति स्वरुपा है इसका अहसास किया। शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए कविता ने उन बेटियों को स्कूल से जोडऩे का काम किया जो स्कूल छोड़ चुकी थी। स्वयं की सेलेरी से फीस भरकर आज भी कविता करीब 5 बेटियों को दसवीं ओपन की पढ़ाई करवा रही है। स्वयं ने इसी साल एमटेक की पढ़ाई पूरी की ओर बच्चियों को घर पर निशुल्क ट्यूशन करवाने का काम कर रही है। महिलाएं आत्मनिर्भर बने इसके लिए शोभागपुरा, रेबारियों का गुड़ा ओर रघुनाथपुरा की 500 महिलाओ को स्वयं सहायता समूह से जोडऩे जैसा काम किया है। तत्कालिन राज्यपाल कल्याणसिंह भी उच्च शिक्षिक महिला सरपंच कविता की प्रशंसा कर चुके है। प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर इनको कई सम्मान मिले हैं।
एयर राइफल शूटिंग में दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी- अपूर्वी चंदेला उदयपुर निवासी अन्तरराष्ट्रीय निशानेबाज जिसने कॉमनवेल्थ गेम्स ग्लासगो में 10 मीटर एयर राइफ ल शूटिंग इवेंट में 206.7 का स्कोर बनाकर भारत को दूसरी बार निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिलाया। शीर्ष भारतीय निशानेबाज अपूर्वी चंदेला ने जहां देश विदेश में उदयपुर और प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया, वहीं यह साबित कर दिया कि बेटियां किसी माने में बेटों से कम नहीं। अपूर्वी अब 2020 में होने वाले टोक्यो ओलम्पिक की तैयारी में जुटी हुई है। अपूर्वी पिछले दिनों दस मीटर एयर राइफल में दुनिया की नम्बर एक खिलाड़ी रह चुकी हैं। अपूर्वी के पिता कुलदीप चंदेला और मां बिन्दु राठौड़ हैं।
जलपरी ने मनवाया पूरी दुनिया में लोहा- भक्ति शर्माजलपरी भक्ति शर्मा ने तैराकी के क्षेत्र में पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। उनकी इसी पहचान की वजह से फोब्र्स की ओर से 2019 के लिए जारी कि गई ‘मोस्ट पावरफुल’ महिलाओं की सूची में भक्ति शर्मा को भी शामिल किया गया है। भक्ति ने14 जनवरी, 2015 को अंटार्कटिक महासागर में एक डिग्री सेल्सियस तापमान में 1.4 मील की दूरी 52 मिनट में तैरकर विश्व रिकार्ड बनाने का गौरव हासिल है। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वे विश्व की सबसे कम उम्र की युवा तथा प्रथम एशियाई महिला हैं। भक्ति ने ढाई साल की उम्र से ही तैराकी करना शुरू कर दिया था। वे इंग्लिश चैनल पार करने का भी रिकॉर्ड पूर्व में बना चुकी हैं। उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं।
क़ैंसर को हराया और अब दूसरों की प्रेरणा- डॉ. रेणु खमेसराएमबी चिकित्सालय में पूर्व न्यूरो फिजिशियन डॉ. रेणु खमेसरा को कभी कैंसर जैसी घातक बीमारी ने जकड़ लिया था लेकिन उन्होंने इससे हार मानने के बजाय इससे लड़ाई की और वे दूसरों को भी ऐसी ही हिम्मत देती हैं। 1994 में उन्हें ओवेरियन कैंसर का पता चला तो घरवाले घबराए लेकिन उन्होंने हौसला बनाए रखा। करीब दो साल तक इलाज चला और वे कुछ ठीक हो पाई। अपनी जिंदगी फिर से जीने लगी थी कि 8 साल बाद वापस बीमारी फैल गई। फिर से ऑपरेशन व थैरेपीज का सिलसिला चला। इसके बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी और इलाज होने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बेंगलूरु भी गई। अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनके पास कई मरीज आते हैं जो बीमारियों के कारण निराश हो जाते हैं, लेकिन वे उन्हें जिंदगी को खुशगवार होकर जीने के लिए प्रेरित करती हैं और एक अलग ही उत्साह पैदा कर देती हैं।
इंग्लिश चैनल पार करने वाली सबसे युवा तैराक: गौरवी सिंघवी हाल में इंग्लिश चैनल पार करने वाली दुनिया की सबसे युवा तैराक गौरवी केवल 16 वर्ष की है। इसे लोग जलपरी कहते हैं। गौरवी सिंघवी के पिता अभिषेक सिंघवी और मां मां शुभ सिंघवी है। गौरवी ने लंदन के डोवर से फ्र ांस तक का करीब 40 किलोमीटर का समुद्री रास्ता पार किया। जिसे इंग्लिश चैनल कहा जाता है, उसे 13 घंटे 26 मिनट तक तैराकी कर पार किया। इससे पहले लेकसिटी की इस होनहार जलपरी ने जुहू बीच से गेटवे ऑफ इंडिया तक ओपन स्वीमिंग कर 47 किलोमीटर का समुद्री सफर तय किया था। इसके लिए गौरवी ने 9 घंटे 22 मिनट में यह दूरी तय की थी।
मरीजों और गरीबों की सेवा है इनका जुनून- प्रेमलता मेहता प्रेमलता मेहता ऐसी महिला हैं जो निस्वार्थ भाव से जनसहयोग का काम कर रही हैं। यह कार्य भी एक-दो दिन से नहीं पिछले 30 वर्ष से कर रही हैं। वे 1990 में लॉयन्स क्लब से जुड़ी। इसके बाद से ही एमबी चिकित्सालय में सेवाएं देना शुरू कर दिया। प्रतिदिन शाम को चिकित्सालय जाकर लॉयन्स क्लब के सहयोग चलने वाले मेडिसिन बैंक से जरूरतमंदों को सहयोग दिलवाने लगी। मेहता होमसाइंस कॉलेज से वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त हुई। इसके बाद से प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय चिकित्सालय जाकर लोगों की मदद करती है। शाम को सभी वार्ड में जाकर चिकित्सकों से मरीजों के बारे में जानकारी जुटाती हैं और उनकी हर संभव मदद करने की कोशिश की जाती है। मेहता आई बैंक सोसायटी के माध्यम से लोगों को नेत्रदान के लिए भी प्रेरित करती हैं। वे रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्य भी हैं।
पिता की प्रेरणा से साकार हो गई ‘कल्पना’- कल्पना अग्रवालपिता ने जो राह दिखाई थी उसे मन में उतार संकल्प के साथ आठ साल पहले कल्पना अग्रवाल तारा नेत्रालय व आनंद वृद्धावस्था की स्थापना कर ऐसी सेवा सुश्रुषा में जुटी कि आज उनके संस्थान में लाभ पाने वाला हर पीडि़त उन्हें अपनी बेटी बना बैठा। अपनों के सताए वृद्धा की आंखों के आंसू पोछने के साथ ही कल्पना आज अपने सहयोगी दीपेश मित्तल व पूरी टीम के साथ उनकी सेवा कर रही थे तो नेत्रहीन की ज्योति लौटाकर उनकी जीवन में उजियारा फैला रही है। उदयपुर के अलावा दिल्ली, मुंबई, फरीदाबाद, गाजियाबाद में तारा नेत्रालय व फरीदाबाद प्रयागराज व उदयपुर में आनंद आश्रम चल रहे। नेत्रालय में लोग निशुल्क इलाज करवा रहे तो वृद्धाश्रम में 140 वृद्ध रह रहे हैं।
मनोरोगियों को दिया सम्बल- सिस्टर डेमियनशिक्षक के रूप में सेवा व बाद में सेवानिवृत्ति के बाद सिस्टर डेमियन ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए उन्होंने मानसिक विक्षिप्तों की सेवा का रास्ता चुना। उदयपुर में वर्ष 1998 में शुरू हुआ सेवा का यह सिलसिला आज यह आशाधाम आश्रम सोसायटी के नाम से जाना जाता है। सिस्टर डेमियन अपनी सहयोगियों के साथ जाति व उम्र को परे रखकर दैहिक व मानसिक रूप से पीडि़त व्यक्तियों के लिए निश्चल हृदय से सेवा कर रही हैं।
Updated on:
30 Sept 2019 07:10 pm
Published on:
30 Sept 2019 07:09 pm

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