
मानवेन्द्र सिंह राठौड़/उदयपुर . राज्य सरकार ने प्रदेश में सहकारिता संस्थाओं के चुनाव करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। लोकसभा चुनाव के बाद राज्य की साढ़े 6 हजार ग्राम सेवा सहकारी समितियों और बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के चुनाव कराए जाएंगे। इनके आखिरी बार चुनाव वर्ष 2011 में हुए थे। इनके साथ ही राज्य में 27 केन्द्रीय सहकारी बैंकों और भूमि विकास बैंकों के भी चुनाव होंगे। सरकार की मंशा के अनुसार पहली बार अऋणी सदस्यों को चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अधिकार देने का मसौदा तैयार हो रहा है। शैक्षिक योग्यता और तीसरी बार चुनाव नहीं लडऩे की बाध्यता को भी खत्म कर दिया जाएगा।
प्रदेश के सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि लम्बे समय से सहकारिता संस्थाओं के चुनाव नहीं हुए हैं। लोकसभा चुनाव निकट है। इसके बाद संस्थाओं के चुनाव करवाए जाएंगे। भाजपा शासन में सहकारिता संस्थाओं के चुनाव में शैक्षिक योग्यता की बाध्यता लागू कर रखी थी जिसे खत्म किया जाएगा। अऋणी सदस्यों को मताधिकार देने पर विचार कर रहे हैं जिससे सहकारिता में आम किसान की भागीदारी बढेग़ी।
व्यवस्थापकों को भी खुश करने की तैयारी
आंजना ने बताया कि सरकार राज्य के करीब 10 हजार ग्राम सेवा सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों और सहायक व्यवस्थापकों का कैडर जो पूर्व में बंद कर दिया गया था जिसका पुन: निर्धारण कर समेत कई समस्याओं को सुलझाने पर विचार कर रही है। अब तक व्यवस्थापक सरकारों से उन्हे नियोक्ता घोषित करने की मांग करते आ रहे हैं।
समय पर मिलेगा खरीफ ऋण
सहकारिता मंत्री ने बताया कि कर्जमाफी के बावजूद खरीफ फसल का ऋण किसानों को समय पर उपलब्ध हो जाए, सरकार इसकी व्यवस्था में जुटी हुई है। सहकारी बैंकों को पुनर्भरण राशि दो किस्तों में चुकाने की व्यवस्था कर रहे हैं। आंजना ने कहा कि किसानों को नया ऋण लेने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने देंगे। राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिया गया कृषि ऋण माफ करने के लिए बैंक अधिकारियों से सरकार स्तर पर चर्चा चल रही है जिसमें बैंक और सरकार किसानों को कितनी रियायत दे सकती है इस पर मंथन हो रहा है।
Published on:
15 Feb 2019 01:06 pm
