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उदयपुर : मर्ज से ज्यादा दवा का दर्द…लंबी कतार, बढ़ता इंतजार…मरीज-परिजन लाचार

मरीजों ने अतिरिक्त काउंटर, डिजिटल टोकन सिस्टम और बेहतर दवा वितरण व्यवस्था की मांग की है, जबकि आरएनटी प्राचार्य ने व्यवस्थाओं की समीक्षा कर सुधार के निर्देश देने की बात कही है।
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डीडीसी काउंटरों पर रोजाना उमड़ रही भीड़

उदयपुर. आरएनटी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए बनाई ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर (डीडीसी) व्यवस्था मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। एमबी अस्पताल के डीडीसी काउंटर पर रोजाना सुबह से दोपहर तक मरीजों और उनके परिजन की लंबी कतारें लग रही हैं। बुधवार को एमबी अस्पताल के मुख्य डीडीसी काउंटर पर उस समय हंगामे जैसी स्थिति बन गई, जब मरीजों ने दवा वितरण में पक्षपात का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। कुछ देर तक काउंटर के बाहर बहस का माहौल रहा और मरीजों में नाराजगी साफ दिखाई दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लंबे समय से लाइन में खड़े मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों की पर्चियां लेकर उन्हें सीधे दवा उपलब्ध कराई गई। यह देखकर मरीजों और उनके परिजन ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि कुछ लोगों को विशेष सुविधा क्यों दी जा रही है।आरोप है कि विरोध दर्ज कराने पर संबंधित कर्मचारियों ने उनकी शिकायत सुनने के बजाय नाराजगी जताई। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें कहा गया कि विरोध करने से दवा मिलने में और अधिक समय लगेगा। शिकायत की बात कहने पर भी कर्मचारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। इससे कतार में खड़े अन्य मरीजों का भी आक्रोश बढ़ गया। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ओपीडी खत्म होते ही बढ़ जाता दबाव

अस्पतालों में सुबह से मरीजों की भारी भीड़ रहती है, लेकिन ओपीडी समाप्त होने के बाद डीडीसी काउंटर पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। डॉक्टरों से परामर्श लेने के बाद अधिकांश मरीज एक साथ दवा लेने पहुंचते हैं, जिससे काउंटर्स के बाहर लंबी कतारें लग जाती हैं। इस दौरान बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, दिव्यांग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी कई घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार काउंटर के बाहर अव्यवस्था जैसी स्थिति बन जाती है।---

नहीं सुधरे हालात

अस्पताल प्रशासन ने डीडीसी काउंटर्स पर अतिरिक्त फार्मासिस्ट तैनात किए हैं, लेकिन इसका अपेक्षित लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा। मरीजों का कहना है कि पर्चियों की जांच, दवा का मिलान और वितरण प्रक्रिया में काफी समय लगने से कतारें लंबी होती जाती हैं। कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बावजूद प्रतीक्षा समय में कोई कमी नहीं आई है।

हर अस्पताल में एक जैसी तस्वीर

एमबी अस्पताल का मुख्य डीडीसी काउंटर सबसे अधिक दबाव झेल रहा है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज पहुंचते हैं। ट्रॉमा सेंटर में दुर्घटना और आपातकालीन मरीजों के परिजन को भी दवा लेने के लिए इंतजार करना पड़ता है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हृदय, न्यूरो और किडनी रोगियों की अधिक संख्या के कारण वहां भी भीड़ बनी रहती है। वहीं जनाना अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और नवजात के परिजन को भी दवा लेने के लिए कतारों का सामना करना पड़ रहा है।---

व्यवस्था सुधारने की उठी मांग

मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है मरीजों की संख्या के अनुरूप डीडीसी काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाए, डिजिटल टोकन सिस्टम लागू किया जाए, अलग-अलग विभागों के लिए अलग दवा वितरण व्यवस्था बनाई जाए तथा ओपीडी के पीक आवर्स में अतिरिक्त काउंटर संचालित किए जाएं।

पहले ही आवश्यकता के अनुसार दवा वितरण और पर्ची काउंटर बढ़ाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सभी अधीक्षकों को व्यवस्था की समीक्षा कर तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दे रहा हूं ।

डॉ. राहुल जैन, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज