26 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

लीड……भीम की सियासत में नया अध्याय: 78 साल बाद मिली नगर पालिका, पहली बार महिला अध्यक्ष की होगी ताजपोशी

उदयपुर

image

Newsdesk

Aug 26, 2026

Rajasthan

B20 वार्ड, 20 बूथ और 8094 मतदाता तय करेंगे भीम का पहला नगर सत्ता समीकरणB
Bभीम. Bदेश की आजादी के 78 साल बाद ग्राम पंचायत से नगर पालिका में क्रमोन्नत हुए भीम कस्बे की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। पहली बार होने जा रहे नगर पालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चाय की थड़ियों से लेकर सदर बाजार और सार्वजनिक चौपालों तक इन दिनों एक ही सवाल चर्चा के केंद्र में है, भीम का पहला नगर पालिका अध्यक्ष कौन होगा? चुनाव को और रोचक बनाने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य सरकार ने पहली अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित किया है। ऐसे में भीम के इतिहास में पहली बार कस्बे की नगर सत्ता की कमान किसी महिला अध्यक्ष के हाथों में होगी। आरक्षण के बाद अब राजनीतिक दलों और संभावित दावेदारों की नजरें पार्षदों के चुनावी गणित पर टिक गई हैं।
B8094 मतदाता लिखेंगे भीम का नया राजनीतिक इतिहासB
भीम नगर पालिका क्षेत्र में कुल 20 वार्ड बनाए गए हैं और प्रत्येक वार्ड के लिए एक मतदान केंद्र निर्धारित किया गया है। यानी नगर पालिका के पहले चुनाव में कुल 20 बूथों पर मतदान होगा। इस ऐतिहासिक चुनाव में 8094 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 4095 पुरुष, 3998 महिला और 1 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। पहली बार पार्षद चुनने के अवसर को लेकर युवा और महिला मतदाताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
Bहर वार्ड में नया चेहरा, हर गली में नया सियासी गणितB
ग्राम पंचायत व्यवस्था में जहां सरपंच पूरे गांव से चुना जाता था, वहीं नगर पालिका बनने के बाद अब वार्ड प्रणाली लागू हो गई है। इससे भीम की राजनीति का पूरा स्वरूप बदल गया है। अब 20 वार्डों से 20 पार्षद चुने जाएंगे और यही पार्षद मिलकर नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। यही कारण है कि इस बार पार्षद का चुनाव सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हर गली-मोहल्ले में नए चेहरे और नए समीकरण उभरेंगे, वहीं अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता भी इन्हीं 20 पार्षदों के चुनावी परिणामों से होकर गुजरेगा।
Bविकास पर होगा वोट का फैसलाB
नगर पालिका बनने के साथ ही नगरवासियों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। मतदाताओं के सामने विकास के कई मुद्दे हैं। टूटी सड़कें और नालियों की समस्या, पेयजल और नियमित सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था के साथ ही सुजाजी चौक जैसे मुख्य बाजारों के सौंदर्यीकरण को लेकर भी लोगों की अपेक्षाएं जुड़ी हुई हैं। मतदाताओं का कहना है कि वे ऐसे प्रत्याशी को चुनेंगे, जो चुनाव जीतने के बाद भी पांच साल तक अपने वार्ड में सक्रिय रहे और समस्याओं के समाधान के लिए काम करे। कुल मिलाकर भीम नगर पालिका का यह पहला चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि भीम के शहरी भविष्य और विकास की दिशा तय करने वाला चुनाव होगा। अब सबकी निगाहें आरक्षण लॉटरी के बाद सामने आने वाले प्रत्याशियों और उनके चुनावी समीकरणों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में 20 वार्डों की यह सियासी बिसात तय करेगी कि भीम की पहली नगर सत्ता की कमान आखिर किस महिला अध्यक्ष के हाथों में पहुंचेगी।