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यहां सरकारी नियम लांघकर निजी स्कूलों ने बना दिए अपने नियम, कर रहे यह काम

निजी स्कूलों की मनमानी थम नहीं रही है। कमाई के लिए सरकार के नियम तोडक़र अपने नियम बना लिए हैं। बच्चों-अभिभावकों को स्कूल का नाम लिखी कॉपियां और यूनिफॉर्म मनमाने दाम पर खरीदने को बाध्य किया जा रहा है।

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निजी स्कूलों की मनमानी
स्कूल का नाम लिखी कॉपियां, ड्रेस मनमाने दाम पर खरीदने का दबाव

चन्दनसिंह देवड़ा/उदयपुर . निजी स्कूलों की मनमानी थम नहीं रही है। कमाई के लिए सरकार के नियम तोडक़र अपने नियम बना लिए हैं। बच्चों-अभिभावकों को स्कूल का नाम लिखी कॉपियां और यूनिफॉर्म मनमाने दाम पर खरीदने को बाध्य किया जा रहा है।

दबाव डालकर बेची जा रहीं कॉपियां बच्चों के लिखने के लिए कम और स्कूलों के प्रचार में अधिक काम आ रही हैं। शहर के अधिकांश निजी स्कूल बच्चों को केवल उन्हीं कॉपियों के साथ कक्षा में बैठने देते हैं, जिन पर संबंधित स्कूल का नाम लिखा होता है। अन्य कॉपियों में बच्चों को न तो काम करने दिया जाता है, न ही टीचर उन्हें जांचते हैं।

बाजार से दोगुने दाम
बच्चों को स्कूल का नाम लिखी कॉपियां खरीदने के लिए न
केवल बाध्य किया जा रहा है बल्कि बाजार कीमत से दोगुनी कीमत वसूली जा रही है। जो कॉपी बाजार में 20-25 रुपए में उपलब्ध है, उस आकार व उतने ही पेज की कॉपियों को स्कूल 40-50 रुपए तक में बेच रहे हैं।

सरकार का यह नियम
सरकार ने पिछले साल सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया था कि स्कूल बच्चे को विशेष कॉपी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। न ही कॉपी-किताब की कीमत बाजार से अधिक वसूल सकते हैं। साथ ही कॉपी, किताब व पाठ्यसामग्री पर अपना प्रचार नहीं कर सकते।


कॉपियां भी अलग-अलग वैरायटी की,खरीदना जरूरी
पीली पतली कॉपी (20-25 पन्ने) : 15-20 रुपए
सामान्य कॉपी : 40-50 रुपए प्रति कॉपी
गणित की कॉपी : 40-50 रुपए प्रति कॉपी
ड्राइंग की कॉपी : 80-150 रुपए प्रति कॉपी


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