10 साल पहले अपनाई थी जैविक खेती, क्षेत्र के किसानों को भी कर रहे प्रेरित
पूरणमल साहू/सिन्दु. आज के दौर में कृषि में किसान नित नए नवाचार के माध्यम से फसल में अधिक उपज के प्रयास में किसान रासायनिक उर्वरकों का सहारा ले रहे है, वहीं तहसील के एक प्रगतिशील किसान पिछले 10 वर्षों से जैविक खाद का प्रयोग कर रासायनिक उर्वरक के मुकाबले अधिक मुनाफा कमा रहे है।
बात कर रहे है सिन्दु के खाणना मगरी निवासी प्रगतिशील किसान मांगीलाल डांगी की। किसान ने जैविक खाद निर्माण को लेकर अपने खेत में खाद का प्लांट बनाया है। जिसके माध्यम से वह विगत 10 वर्षों से जैविक खाद का उत्पादन कर अपने ही खेत में इसका उपयोग कर रहा है। जिससे उसे रासायनिक उर्वरक के मुकाबले अधिक उपज भी मिल रही है।
भूमि की बढ़ी उर्वरक क्षमता व उत्पादन
किसान मांगीलाल ने बताया कि उसने अपने खेत में वर्मी कम्पोस्ट खाद का प्लांट तैयार किया। वहीं से वह खाद को तैयार करता है। जिसके उपयोग से जहां खेत की भूमि की उर्वरता क्षमता बढ़ रही है और फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। पूर्व में यूरिया या अन्य रासायनिक खाद से उसे करीबन 8 से 10 ङ्क्षक्वटल गेहूं की उपज हो रही थी। लेकिन जैविक खाद के उपयोग के बाद से उसे 10 से 12 ङ्क्षक्वटल गेहूं की पैदावार हुई। वहीं गेहूं की फसल में आने वाली बालियों में फर्क नजर आया। इसके बाद से उसने इसे ही अपनाते हुए जैविक तरीके से खेती करना शुरू किया।
इस तरह करें खाद का प्रयोग
किसान मांगीलाल ने बताया कि जब गेहूं की बुवाई करते हैं तब गेहूं के साथ जैविक खाद भी साथ में डालना चाहिए। करीब 21 दिन बाद कोर पान (पहली बार पिलाई) से पहले जैविक खाद का उपयोग कर पिलाई करें। बता दें, डीएपी खाद की तुलना में जैविक खाद की कीमतों में कमी रहती है। इसे लेकर वह क्षेत्र के आमजन को भी प्रेरित कर रहे है तथा वर्मी कम्पोस्ट बनाना सीखा रहे है। वहीं कई किसानों ने भी जैविक खेती को किसान मांगीलाल से प्रेरित होकर अपनाया।
ऐसे तैयार कर रहे जैविक खाद
किसान ने बताया कि पहले एक 10 फीट लंबा, 1 फीट चौड़ा व 4 फीट ऊंचा बेढ तैयार किया जाता है। जिसके अंदर कूड़ा, करकट, गोबर, पेड़ों की पत्तियां व पानी छिड़का जाता है। उसे ठंडा करने के बाद गड्ढे में केंचुए डाले जाते है। जो कूड़ा, करकट, गोबर व पेड़ों की पत्तियों को खाते है। जिसके बाद केंचुए के मल से जैविक खाद तैयार होता है।
यह है फायदे