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Rajasthan Chunav Result: बीएपी ने खींची लकीर, भाजपामय हुआ मेवाड़

पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदेश से इतर जनादेश देने वाला उदयपुर संभाग इस बार दो हिस्सों में बंटा नजर आया। मेवाड़ में भाजपा की ध्रुवीकरण की रणनीति का ऐसा असर पड़ा कि कई दिग्गज चारों खाने चित हो गए।

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अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट
पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदेश से इतर जनादेश देने वाला उदयपुर संभाग इस बार दो हिस्सों में बंटा नजर आया। मेवाड़ में भाजपा की ध्रुवीकरण की रणनीति का ऐसा असर पड़ा कि कई दिग्गज चारों खाने चित हो गए। मेवाड़ की 19 सीटों में भाजपा ने 15 जीत लीं, जबकि कांग्रेस के हाथ सिर्फ दो सीटें लगीं। एक सीट निर्दलीय चंद्रभान आक्या ने जीती तो एक भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई। वहीं वागड़ की बात करें तो यहां लोगों ने कांग्रेस का साथ दिया। वागड़ की 9 सीटों में कांग्रेस को पांच, भारत आदिवासी पार्टी को दो व एक सीट भाजपा को मिली।

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दरअसल, चुनाव में उदयपुर के कन्हैया हत्याकांड को भाजपा ने बड़ा मुद्दा बनाया। इसकी शुरूआत अमित शाह ने बेणेश्वर धाम की रैली से कर दी थी। यहीं से तय हो गया कि भाजपा अशोक गहलोत की योजनाओं की काट के लिए ध्रुवीकरण का कार्ड खेलेगी। इसके बाद जितनी भी रैलियां हुईं उसमें सबसे अहम कन्हैया हत्याकांड और महिला सुरक्षा को रखा गया। इसका असर मेवाड़ में देखने को मिला।
कन्हैया हत्याकांड को भाजपा ने बड़ा मुद्दा बनाया। इसकी शुरूआत अमित शाह ने बेणेश्वर धाम की रैली से कर दी थी। यहीं से तय हो गया कि भाजपा अशोक गहलोत की योजनाओं की काट के लिए ध्रुवीकरण का कार्ड खेलेगी।

संभाग में भाजपा का प्रचारतंत्र कांग्रेस से काफी आगे था। पार्टी ने हर सीट के लिए एक्सरसाइज की थी। वल्लभनगर-मावली जैसी सीट पर शुरूआती दौर में पिछड़ती दिख रही भाजपा को योगी की सभा ने संजीवनी दे दी। इसमें से वल्लभनगर को भाजपा ने जीत लिया, जबकि मावली मामूली अंतर से हार गई। राजसमंद की बात करें तो प्रधानमंत्री मोदी की सभा और अमित शाह के रोड शो से पार्टी क्लीन स्वीप कर गई।

वागड़ में कांग्रेस को गहलोत की योजनाओं का लाभ जरूर मिला। पिछले एक साल में गहलोत ने संभाग में यहां सबसे अधिक दौरे किए थे। इसके कारण लड़ाई में भाजपा तीसरे नंबर पर पहुंच गई।

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उधर, जल-जंगल, जमीन पर अपने हक की बात करते हुए गठित हुई भारत आदिवासी पार्टी ने एक नई लकीर खींच दी है, जिसे पार पाने में दोनों दलों के पसीने छूट गए। उदयपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर में पार्टी के प्रत्याशियों ने अप्रत्याशित प्रदर्शन किया। तीन सीटें जीतने के साथ ही बीएपी कई सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। सलूम्बर जैसी सीट रघुवीर मीणा की हार कारण बनी।

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