
भगवान की जमीनों पर बैठ गए भक्त और पुजारी
मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. उस जमाने में भगवान के मंदिरों के साथ जमीनें दी गई। कृषि भूमि से घास गौशालाएं तक पहुंचती थी। आज इन बेशकीमती जमीनों पर अतिक्रमण हो गए है। किसी पर पुजारी ने कब्जा कर लिया तो कहीं भक्तों ने। सरकारी विभागों ने भी नियमों का हवाला देते हुए भगवान के नाम की जमीनों को भी अवाप्त कर दिया। इसके बाद आवासन मंडल से लेकर यूआइटी ने वहां कॉलोनियां काट दी। कई मामले कोर्ट में चल रहे है।
तब महाराणाओं ने मंदिरो की गौशालाओ के लिए जमीनें भेंट दी थी, बताते है कि पूरे के पूरे गांव की जमीनें भगवान के लिए दे दी।
करीब 107 वर्ष पूर्व आम पब्लिक के लिए एक आदेश तब निकाला गया जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि उदयपुर जिले में विभिन्न मंदिरो, मस्जिदों, श्मशान तथा कब्रिस्तान वगैरह के खर्चे चलाने के लिए लिये जमीन-जायदाद गांव भेंट है तथा जागीर में है, उनको कोई भी व्यक्ति निजी सम्पति नहीं समझेगा, ना बेचेगा, ना गिरवी रखेगा। पुजारी को घर बसा कर रहने का कोई अधिकार नहीं होगा और वे इन सार्वजनिक स्थानों को निजी नहीं समझेंगे।
ऐसे भगवान की जमीने खुर्द-बुर्द हुई
- गोवर्धन विलास में पहले जहां थाना संचालित था वहां गोकुल चंन्द्रमा जी की गौशाला थी जब से थाना नए भवन में शिफ्ट हो गया उसके बाद भी वहां से अभी तक देवस्थान को कब्जा नहीं मिला।
-गोवर्धन विलास, बलीचा, सविना, भुवाणा, कविता, मावली में मंदिरों की भूमि गौशाला के लिए दी गई थी जिन पर कब्जे, निर्माण हो गए थे।
- सविना, भुवाणा, बलीचा आदि क्षेत्र में मंदिर की जमीनों पर कॉलोनियां कट चुकी, इनमें कुछ कब्जे है तो कुछ पर आवासन मंडल व यूआइटी ने अवाप्त कर ली।
- सेवानिवृत आईएएस डी.बी. गुप्ता ने देवस्थान का रिकार्ड कम्प्युटराइज्ड कराया था। इसके बाद इन जमीनों की सुरक्षा को लेकर कोई काम नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात तो यह है कि कई मामले बरसों से कोर्ट-कचहरी में चल रहे है।
आधी घास गांव वालों की तो आधी गौशाला आती
जानकार बताते है कि गोकुल चन्द्रमा मंदिर की गौशाला से गायों का दूध मंदिर तक आता था। मंदिर की जमीनों पर होने वाली घास कटती थी जिसमें से आधी गांव वाले व आधी गौशाला आती थी।
गोवर्धन विलास के पुराने पुलिस थाने में गौशाला चलती थी व वहां बड़ा घासघर भी था।
इस तरह कृषि भूमि की स्थिति
- पुजारियों ने अतिक्रमण कर लिया
- लोगों ने अतिक्रमण कर लिए
- यूआईटी व आवासन मंडल ने अवाप्त कर ली
- अवैध गौशलाएं संचालित
- मामले कोर्ट में बरसों से विचाराधीन
मंदिर का नाम... कृषि भूमि खाते
बालाजी हनुमान मंदिर, गोवर्धन विलास... 1.1950
लाखन श्याम जी, उथरदा... 12.9900
बाण माताजी कंवरपदा महल... 0-9300
श्याम सुंदर जी... 903.1550
जगत शिरोमणि मंदिर... 132.3618
गोकुल चन्द्रमा... 581.75
वृदांवन चन्द्रमा... 14.7180
जगन्नाथ राय, जगदीश चौक... 27.6024
भोजनाथ महादेव, एमजी कॉलेज पास... 3.2850
उदय श्याम जी, उदयसागर... 103450
(हैक्टयर में)
देवस्थान में वर्जन....
इनका कहना है...
हमने इस पर सर्वे वगैरह कराना शुरू कर दिया। अभी हम एक-एक गांव ले रहे है। इसके साथ ही संबंधित तहसीलदारों को देव भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए भी पत्र लिख रहे है और उसका फॉलोअप भी कर रहे है। उदयपुर जिले के कविता में हमने पिछले कुछ महीने पहले केस जीतने के बाद कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाया और वहां चारदीवारी का काम भी किया। स्टाफ की कमी भी है और कोविड की वजह से काम प्रभावित हुआ है लेकिन हमारा इस पर पूरा फोकस है।
- डा. प्रियंका भट्ट, सहायक आयुक्त देवस्थान
Published on:
31 May 2021 11:34 am
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