
उदयपुर केंद्रीय कारागार (फाइल फोटो)
उदयपुर. तमाम दिशा-निर्देशों और प्रयासों के बावजूद राजस्थान की जेलों में बंदियों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। 80 प्रतिशत जेलें ओवरलोड हैं। सेंट्रल जेलों और जिला जेलों की हालत ज्यादा खराब है। यह जरूर है कि प्रदेश की उपजेलों में स्थिति कुछ हद तक जरूर ठीक है। अगर 31 जुलाई, 2022 तक के आंकड़ों पर गौर करें तो 21475 की क्षमता के सापेक्ष 22470 बंदी और कैदी जेलों में बंद हैं।
दरअसल, केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम प्रयासों के बावजूद जेलों की हालत में सुधार नहीं हो पा रहा है। कई तरह के विधिक सलाह अभियान चलाने और समय-समय पर कैदियों को रिहा करने के बावजूद संख्या घटने की बजाय बढ़ रही है। कई मामले ऐसे हैं जहां सही ढंग से लीगल पैरवी नहीं होने और छोटे अपराध के बावजूद वर्षों से अंडर ट्रायल जेल में बंद हैं।
केंद्रीय कारागारों में सबसे अधिक उदयपुर में बंदी
प्रदेश की 9 केंद्रीय जेलों में सबसे अधिक ओवरलोड उदयपुर केंद्रीय कारागार है। यहां क्षमता से डेढ़ गुना यानी 152 फीसदी अधिक कैदी/बंदी रखे गए हैं। अहम यह कि इनमें से अधिकांश उदयपुर के नहीं हैं। बाहर के जिलों से बंदी और कैदी लाकर यहां रखे जा रहे हैं। 31 जुलाई, 2021 के आंकड़ों के अनुसार 1385 कैदी/बंदी यहां रखे गए थे, जबकि क्षमता 910 की है। प्रदेश की अन्य केंद्रीय कारागारों की बात करें तो कोटा में 132 प्रतिशत, जयपुर में 123 प्रतिशत, गंगानगर में 119 प्रतिशत, जोधपुर में 110 तो अजमेर में 120 प्रतिशत क्षमता के सापेक्ष कैदी/बंदी हैं।
जिला जेलों की हालत बदतर, राजसमंद में क्षमता से तीन गुना अधिक भार
राजस्थान के 26 जिला जेलों की बात करें तो यह 123 फीसदी ओवरलोड है। यहां 6085 के सापेक्ष 7503 कैदी/बंदी रखे गए हैं। राजसमंद में क्षमता से तीन गुना अधिक भार है। यहां 55 के सापेक्ष 169 बंदी/कैदी हैं। डूंगरपुर, पाली, नागौर की में भी क्षमता से दोगुना भार है। 26 में सिर्फ चार जेल (धौलपुर, बूंदी, दौसा और करौली) में क्षमता से कम बंदी/कैदी रखे गए हैं।
केंद्रीय कारागार से उपकारागारों में शिफ्ट कर रहे बंदी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एडीजे कुलदीप शर्मा ने बताया कि समय-समय पर अभियान चलाया जा रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव पर नालसा और रालसा के तहत 107, 116, 151 में बंद बंदियों को लीगल सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें रिहा कराया गया। उदयपुर केंद्रीय कारागार में बंद बंदियों को झाड़ोल और कोटड़ा उपकारागार में शिफ्ट किया जा रहा है। शर्मा ने बताया कि यहां के उपकारागारों में भी स्थानीय बंदी नहीं हैं।
Updated on:
28 Sept 2022 07:07 pm
Published on:
28 Sept 2022 07:06 pm
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