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यहां बनने जा रहा है राजस्‍थान का पहला बटरफ्लाई पार्क, 60 से अधिक प्रजाति की होंगी त‍ितलियां

Butterfly Park लेकसिटी की जैव विविधता को संरक्षित रखेगा तितलियों का आशियाना, अम्बेरी में तैयार हो रहा राजस्थान का पहला बटरफ्लाई पार्क, बर्ड पार्क के बाद लेकसिटीजंस को एक और खूबसूरत पार्क की मिलेेगी सौगात, संभाग में तितलियों की 100 से अधिक और उदयपुर के अम्बेरी में 60 तरह की प्रजातियां मौजूद

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Butterfly Park क्या आप जानते हैं कि प्रकृति की जैव विविधता बनाए रखने में हर छोटे से छोटे जीव का योगदान है। भले ही वे कीड़े-मकोड़े , मधुमक्खियां हों या तितलियां। तितलियां जैव विविधता की महत्वपूर्ण घटक हैं। वह प्रकृति का ऐसा जीव है, जो पर्यावरणीय संरक्षण के साथ-साथ फसल उत्पादन की वृद्धि में भी योगदान देती है। अब जल्द ही राजस्थान भी राज्य तितली की घोषणा करने वाला है। वहीं, उदयपुर में आने वाले पर्यटक और यहां के स्थानीय लोग तितलियों का रंग-बिरंगा संसार देख सकेंगे। दरअसल, उदयपुर में राज्य का पहला बटरफ्लाई पार्क अम्बेरी में विकसित किया जा रहा है। ऐसे में अब बर्ड पार्क के बाद बटरफ्लाई पार्क की सौगात भी मिल जाएगी, इससे लेकसिटी की जैव विविधता का संरक्षण भी हो सकेगा।

अंबेरी में तितलियों की 60 के लगभग प्रजातियां

संभाग में तितलियों की लगभग 100 प्रजातियां पाई जाती है। इसी स्थान पर 60 के लगभग प्रजाति वर्तमान में है, जिनका संरक्षण अब बटरफ्लाई पार्क के माध्यम से किया जाएगा। पार्क के लिए बजट आवंटन भी किया जा चुका है। संभागीय वन संरक्षक आरके जैन ने शनिवार को बटरफ्लाई पार्क का निरीक्षण किया। जैन ने बताया कि यह राजस्थान का पहला बटरफ्लाई पार्क होगा। इसका कार्य जल्द से जल्द आरंभ कर 2 से 3 माह में पूर्ण करने की संभावना है। इसमें वन सुरक्षा समिति अंबेरी का भी सहयोग है। निरीक्षण के समय उप वन संरक्षक डीके तिवारी, क्षेत्रीय वन अधिकारी नरपत सिंह राठौड़, वनपाल मांगीलाल एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

पर्यावरण की स्वस्थता की प्रतीक हैं तितलियां

तितलियों पर शोध कर रहे डूंगरपुर के विशेषज्ञ मुकेश पंवार के अनुसार, प्रदेशभर में 114 तरह की तितलियां पाई जाती हैं। राजस्थान में मिलने वाली खूबसूरत तितलियों में से एक है, कॉमन जेजेबेल या इंडियन जेजेबेल। ये तितली केवल राजस्थान में ही पाई जाती है। ये तितली अपना जीवनचक्र डेण्ड्रोफ्थोए फाल्काटा वनस्पति पर पूरा करता है। ये वनस्पति घने जंगलों के पुराने पेड़ों पर ही ज्यादा पाई जाती है, जैसे सागवान, हर, तेंदू, सारल, गोंदल, पलाश आदि वृक्षों के ऊपर ही परजीवी के रूप में रहती है। अत: इस एक तितली के संरक्षण के लिए इन अनेकानेक वृक्ष व वन क्षेत्रों के संरक्षण की भी पहल कर सकते हैं। पंवार बताते हैं कि तितलियों का मानव जीवन में बड़ा महत्त्व है। ये तितलियां प्राकृतिक पर्यावरण के उत्तम स्वास्थ्य का प्रतीक है। ये परागकण एकत्रित करती है, जिससे पौधों को फूल से बीज बनाकर वंशवृद्धि में सहयोग मिलता है। तितलियां एवं शलभ स्थानीय खाद्य शृंखला की अहम कड़ी है। इनका भक्षण करके कई तरह के पक्षी, मेंटिस, छिपकलियां, मकडियां, वास्प, ड्रेगनफ्लाई आदि अपना जीवन निर्वाह करते हैं।

राजस्थान आठवां राज्य होगा, जहां राज्य तितली होगी घोषित

इससे पहले देश के सात राज्यों ने राज्य तितली घोषित कर रखी है। राज्य में पाई जाने वाली 100 से अधिक तितली में एक को राज्य तितली का दर्जा दिया जाएगा। इसके लिए तितली प्रेमियों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शोध संस्थानों एवं सिविल सोसायटी से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। वेबसाइट https://forest.rajasthan.gov.in के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।

ओकलीफ (डेडलीफ) है राष्ट्रीय तितली

लॉकडाउन के दौरान 2020 सितंबर में बटर फ्लाई मंथ मनाया गया था, तब देश के तितली प्रेमियों ने कई तरह की तितलियों की खोज की। मेवाड़ में भी 1368वीं तितली खोजी गई। राष्ट्रीय तितली घोषित करने के लिए देशभर में ऑनलाइन वोटिंग की गई। इसके बाद ओकलीफ जिसको डेडलीफ भी कहते हैं, उसे राष्ट्रीय तितली घोषित किया गया। इसकी खासियत यह है कि इसके पंख बंद होने पर यह सूखे पत्ते की तरह दिखाई देती है और खोलने पर पंखों पर तीन रंग दिखाई देते हैं।


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