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विजयादशमी का पर्व बुधवार को पूरे उत्साह व उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर शहर के गांधी ग्राउंड में पूरे दो साल बाद आतिशबाजी के साथ रावण का दहन किया गया। इस दौरान ग्राउंड पर रावण दहन देखने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे। जैसे ही रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया, वैसे ही जय श्रीराम का उद्घोष हो गया और सभी ने एक-दूसरे को दशहरे की शुभकामनाएं दीं।
विजया दशमी पर्व को लेकर सिंधी समाज की बिलोचिस्तान पंचायत की सनातन धर्म सेवा समिति की ओर से रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया। इससे पूर्व दोपहर शक्ति नगर से शोभायात्रा निकली। इसमें बुलेट, आदि में श्रीराम और उनके जीवन से जुड़ी विभिन्न झांकियां शामिल रही। शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए गांधी ग्राउंड पहुंची। शोभायात्रा में राम, लक्ष्मण, हनुमान , रावण आदि के रूप धरे कलाकार भी शामिल थे। गांधी ग्राउंड पहुंचने के बाद राम, लक्ष्मण, हनुमानजी के रूप धरे कलाकारों की विजयी पूजा हुई। इस बीच भव्य आतिशबाजी जारी रही। इसके बाद हनुमानजी ने लंका दहन किया। लंका दहन के बाद राम, लक्ष्मण ने मेघनाद के पुतले का दहन किया गया। इसके बाद कुंभकरण और अंत में रावण के पुतले का दहन किया गया।
100 फीट की लंका जलाई
रावण दहन के साथ ही आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने सभी का मन मोह लिया। लंका दहन से पूर्व भी करके सोने की लंका दिखाई गई। यहां 70 फीट का रावण और 65-65 फीट के कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतले खड़े हुए थे। हनुमान ने पहले 100 फीट की लंका जलाई और शाम 7.15 बजे आतिशबाजी के बीच श्रीराम व लक्ष्मण ने रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के दम्भी पुतलों का दहन किया। इस दौरान आक्रोशित मेघनाद ने आंखें तरेरीं, वहीं श्रीराम ने जब रावण की नाभि पर तीर चलाया तो अहंकारी रावण तिलमिला उठा आंखों को लाल कर चिंगारी निकाली लेकिन राम के बाण के आगे ज्यादा देर तक नहीं टिक सका और अहंकारी का अहंकार चूर चूर हो गया।
Updated on:
05 Oct 2022 11:46 pm
Published on:
05 Oct 2022 11:35 pm
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