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उदयपुर का ये हॉस्‍टल अंधेरा गहराते ही बन जाता है खाैैैफनाक कोठरी …हर वक्‍त खौफ के साये में रहते हैं मेड‍िकाेेज…

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उदयपुर का ये हॉस्‍टल अंधेरा गहराते ही बन जाता है खाैैैफनाक कोठरी ...हर वक्‍त खौफ के साये में रहते हैं मेड‍िकाेेज...

भुवनेश पंड्या/ उदयपुर. ये है आरएनटी मेडिकल कॉलेज का हॉस्टल। यहां वे स्टूडेंट रहते हैं, जो दिन रात एक करके चिकित्सक बनने की तैयारी में हैं। भय व्याप्त और गंदगी के बीच जीवन। भय इसलिए कि शाम होते ही हॉस्टल अंधेरी कोठरी में तब्दील हो जाता है। सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं। कई बार तो जूनियर हॉस्टल के भावी डॉक्टर कमरों से बाहर निकलने से हिचकते हैं। बाहर से चमचमाने वाले हॉस्टल के हाल अंदर से उस झुग्गी-झोंपड़ी की तरह है, जिसमें गंदगी को बाहर से ढंकने की कोशिश की गई हो। अधिकांश कमरों की दीवारों पर सीलन है, वहीं बिजली के बोर्ड दीवारों से उखडकऱ तारों के सहारे लटकें हैं। कहने को यहां रखरखाव पर भारी भरकम बजट आता है, लेकिन हालत देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि बजट का कितना इस्तेमाल होता है। वार्डन तक लाचार है कि कॉलेज प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
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आंखें मूंद बैठे अधिकारी
यहां हाल इसलिए खराब है कि अधिकारियों को हॉस्टल की ओर झांकने की फुर्सत भी नहीं। सुरक्षाकर्मी इसलिए नहीं आता क्योंकि ठेकेदार पैसे नहीं देता। वार्डन और चीफ वार्डन ने तो अर्से से इस ओर मुंह तक नहीं उठाया। सुरक्षा प्रबन्ध नहीं होने से कई बार दुपहिया वाहन चोरी हो चुके हैं। कई मामलों में बात पुलिस तक पहुंची।


सुरक्षाकर्मी लाचार

ठेकेदार के साथ जुड़े सुरक्षाकर्मी नारायणलाल कुमावत ने कहा कि चार माह से ठेकेदार ने एक पैसा नहीं दिया। ठेकेदार ने सोमवार को भी आने की कहा और नहीं आया। कई बार अधिकारियों को भी कहा, लेकिन कोई पीड़ा सुनने को तैयार नहीं। ठेकेदार नारायण गारू पाई-पाई के लिए चक्कर कटवा रहा है।

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एक नजर हॉस्टल पर
- हॉस्टल के बाहर चारों ओर खरपतवार और गंदगी फैली है। प्रवेश द्वार पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं।

- प्रवेश द्वार के सामने की सीढिय़ों पर कुत्तों का डेरा है। कई बार भावी चिकित्सक इनका शिकार हुए हैं।
- हॉस्टल के सामने बना स्पोट्र्स एरिया बेहद खस्ताहाल है। जर्जर, सिलन भरा। यहां व्यायाम के लिए संसाधन तो है, लेकिन महज दिखावे के। बैडमिंटन का वुडन कोर्ट टूट चुका है। कक्ष में हर ओर गंदगी फैली है।

- दिखावे के नाम पर पेयजल के लिए आरओ लगा है, लेकिन समय पर उसकी मरम्मत नहीं होती। विद्यार्थी शुद्ध पानी खरीदने को मजबूर हैं।
- कॉमन रूम मरम्मत के बावजूद बंद है। उसकी टीवी खराब है। जिम ब्लॉक की इमारत भी जवाब दे चुकी है। विद्यार्थी अतिरिक्त समय देकर हॉस्टल से बाहर जिम जाते हैं। डॉक्टरों और विद्यार्थियों के लिए कैंटीन तो है ही नहीं।

- ऊपरी हिस्से का कॉमन रूम डरावने कमरे से कम नहीं। बेहद खस्ताहाल। इसके पास में जो विद्यार्थी रहते हैं, वे बदबू से परेशान हैं।
- कमरों के आगे कई दिनों तक सफाई नहीं होती। जिन कमरों में विद्यार्थी रह रहे हैं, उनकी दीवारों पर सिलन भरी हुई है।

- कमरों में छतें उखड़ चुकी है। हॉस्टल के बीच खाली जगह पर बने सेफ्टीक टैंक तक पूरी तरह से पाटकर बंद नहीं किए गए।
- शौचालय गंदे पड़े रहते हैं।

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हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। गदंगी और भय व्याप्त माहौल के बीच पढ़ाई हो रही है। कई विद्यार्थियों को श्वान का शिकार बनना पड़ा। वार्डन और चीफ वार्डन कभी नहीं आते। सुरक्षाकर्मी भी नहीं रहता।

जयपालसिंह चौधरी, प्रेसिडेंट, स्टूडेंट वेलफेयर काउंसिल
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समस्या का हल नहीं निकल रहा है। सफाई बिल्कुल नहीं हो रही है। ठेकेदार काम नहीं कर रहा। कई बार प्राचार्य को कहा, लेकिन समस्या का हल नहीं हो रहा।
डॉ. आरएल मीणा, वार्डन, सीनियर बॉयज हॉस्टल

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मैं कभी-कभी जाता हूं, इस पर विस्तार से बैठकर बात की जा सकती है।

डॉ. नरेन्द्र कर्दम, चीफ वार्डन, सीनियर-जूनियर बॉयज हॉस्टल


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