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सरस डेयरी व पशु पालन विभाग कर रहा तैयारी, इलायची फ्लेवर्ड गोट मिल्क लाएगा

प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालय पर शुरू करेगा
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मानवेन्द्र सिंह राठौड़/उदयपुर. ऊंटनी के दूध से बने उत्पाद की मांग बढऩे के बाद सरस डेयरी अब बकरी का दूध बाजार में उतारने जा रही है। इस दूध से बने उत्पाद न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से गुणकारी है बल्कि अलग-अलग फ्लेवर के होने से उपभोक्ताओं का जायका भी बढ़ाएंगे। पहले चरण में इलाइची फ्लेवर्ड बाजार में उतारा जाएगा। इसकी मांग बढऩे पर अन्य फ्लेवर भी आएंगे। बकरी दूध के अलावा इससे बने पनीर, श्रीखंड, लस्सी, छाछ भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। पशुपालन विभाग बकरी के दूध को डेयरी के माध्यम से पूरे राज्य में बेचने की तैयारी में जुटा है।

अगर ऐसा होता है तो बकरी पालकों को रोजगार मिलेगा और गोट फार्मिंग को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में सरस डेयरी के करीब 21 हजार विक्रय केन्द्र है, जहां पर यह दूध बेचने की तैयारी की जा रही है। जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग, राजीविका व डेयरी विभाग के इस पायलट प्रोजेक्ट के उदयपुर में उत्साहवद्र्धक परिणाम आने के बाद डेयरी विभाग इसे प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालय पर शुरू करेगा। इस संबंध में तीन दिन पूर्व पशुपालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पवन कुमार गोयल के साथ बैठक भी हुई। बैठक में गोयल ने उदयपुर में इस पहल की सराहना करते हुए राज्य के सभी मुख्यालयों पर बकरी का दूध बेचने के निर्देश दिए।

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राज्य के सिरोही, पाली, जालौर व बाड़मेर जिले में भी संभावना तलाशने के निर्देश दिए हैं।फिलहाल सरस डेयरी झाड़ोल के बाघपुरा गांव से प्रतिदिन 24 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से 138 लीटर दूध खरीद रही है। यह दूध आदिवासी बहुल क्षेत्र के आठ गांवों की 66 महिला स्वयं सहायता समूहों से संग्रहित किया जा रहा है। इससे महिलाओं का स्वालम्बन भी होगा। उदयपुर के अलावा गुजरात और दिल्ली में भी डिमांड होने पर बकरी का दूध वहां भेजा जा रहा है। पाश्चुराइज्ड दूध करीब एक माह तक बिना फ्रीज के काम में लिया जा सकता है। फिलहाल शहर में यह दूध सरस पार्लर व बूथों पर 200 मिली की बोटल में 25 रुपए में मिल रहा है।

बकरी के दूध को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। अन्य जिलों में भी बकरी दूध को बढ़ावा देने की विभाग के स्तर पर कवायद की जा रही है। अब तक इस दूध का कोई उपयोग नहीं होता था। इससे बकरी पालन को बढ़ावा मिलने के साथ ही आदिवासी महिलाओं को रोजगार मिलेगा। बकरियों की नस्ल सुधारने के लिए सिरोही नस्ल के बकरें इन आदिवासी महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को नि शुल्क दिए जाएंगे।

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डॉ.ललित जोशी, उपनिदेशक पशुपालन विभाग
&जल्द ही डेयरी की ओर से इलायची फ्लेवर में दूध को बाजार में लाने की तैयारी चल रही है। प्रमोट करने के लिए इसकी कीमत भी कम कर दी है और सोमवार से 30 रुपए क ी बजाय 25 रूपए में दूध बूथों पर मिलेगा। शहर में जगह-जगह प्रचार प्रसार किया जा रहा है। दूध की खपत और मांग बढी तो भविष्य में 500 से 700 लीटर दूध का संकलन करने की योजना है। - उमेश गर्ग, एमडी, सरस डेयरी

करीब 415 आदिवासी महिलाओं के 66 स्वयं सहायता समूह से बकरी दूध के व्यवसाय से जुड़ी हुई है। बाघपुरा केन्द्र पर रोजाना 138 लीटर दूध संग्रहण किया जा रहा है। अब तक 40-45 हजार रुपए का भुगतान किया जा चुका है। - नरपतसिंह जैतावत, जिला परियोजना प्रबंधक राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद