
कचरे व मलबे से पाट दिया धाबाई तालाब, जिम्मेदार मौन
उदयपुर . भुवाणा चौराहे के पश्चिम में सडक़ किनारे स्थित धाबाई जी के तालाब की समय रहते सुध नहीं ली गई तो वह दिन दूर नहीं, जब इस तालाब को लोग मिट्टी और कचरे से पाट चुके होंगे। इसको पाटने की शुरुआत हो चुकी है। बरसाती पानी के साथ आई मिट्टी तालाब की गहराई पहले ही बहुत कम कर चुकी है, वहीं किनारे पर कचरा डालकर इसके दायरे को संकड़ा किया जा रहा है। कैचमेंट की तरफ खातेदारी जमीनों पर चारदीवारियां खड़ी कर दी गई जिससे तालाब में पानी water की आवक बेहद कम हो गई है। इस तालाब को बरसों से गहरा नहीं किया गया जिससे अन्य जगह का भराव डालकर इसे पाटने के प्रयास भी हो रहे हैं। यूआईटी पैराफेरी के अंतर्गत राजस्व गांव भुवाणा में स्थित यह तालाब आराजी नम्बर 347, 349 में फैला हुआ है। जिम्मेदार यूआईटी, पंचायत और जागरूक नागरिक इस तालाब को बचाने आगे नहीं आए तो यह तालाब केवल कागजों में बचेगा।
पॉलीथिन व कचरे से अटा पेटा
इस तालाब में बबूल के पेड़ खड़े है जिनके चारों ओर पॉलीथिन व कचरे की चादर बिछी हुई है। आसपास के रहने वाले और सडक़ के किनारे गुजरने वाले लोग इस तालाब को कूड़ा पात्र मान चुके हैं।
बहाव क्षेत्र में जगह -जगह अवरोध
इस तालाब में सुखेर की पहाडिय़ों और स्कूल की तरफ से बरसाती पानी बहकर आता था। जल प्रवाह मार्ग में जगह जगह निर्माण होने और उसे पाट देने से तालाब में पानी आसानी से नहीं पहुंच पाता है। इसके पश्चिम में कुछ मकान बने, जिनके लिए भराव डालकर कच्ची सडक़ बना दी गई। तालाब की कच्ची पाल को भी संरक्षित नहीं किया जा रहा है।
धाबाई जी का तालाब पहले हमेशा भरा रहता था लेकिन अब इसकी गहराई कम होने से पानी कम ठहरता है। यूआईटी ने इस तालाब को बचाने की दिशा में जल्द ही कदम नहीं उठाए तो यह भी दूसरे तालाबों की तरह अस्तित्व खो देगा।
- सीमा चोरडिय़ा, पूर्व सरपंच भुवाणा
पैराफेरी के तालाब और सरकारी जमीन यूआईटी प्रन्यास के पास चले गए हैं। पंचायत पहले नरेगा में तालाब को गहरा करवाती थी और पालबंदी भी करवाई लेकिन अब कोई सुध नहीं ले रहा। यूआईटी तालाब नहीं संभाल सकती है तो पंचायत को सौंप दे ताकि संरक्षण समिति बनाकर पंचायत के सभी तलाब हम गांव वाले बचा सकें।
- रमेश डांगी, क्षेत्रवासी भुवाणा
तालाब में पॉलीथिन व कचरे का संग्रहण होने लग गया है जिससे जल और मृदा प्रदूषण होगा जिसके घातक परिणाम झेलने पड़ेंगे। इस तालाब में पानी पहुंचे और ठहरे ताकि आसपास का भूजल स्तर सुधरे अन्यथा इस क्षेत्र में पानी की किल्लत बढ़ जाएगी।
- अनिल मेहता, प्रतिनिधि, झील संरक्षण समिति
Published on:
23 Jun 2019 06:31 pm
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