
‘जब-जब फूल खिले’ एक खूबसूरत और मासूम प्रेम कहानी जब पर्दे पर उतरी, तो एक मुस्कुराते हुए नायक की छवि भी दर्शकों के जेहन में उतर गई। ये थे शशि कपूर, जो कपूर खानदान से होने के बावजूद उसके असर से एकदम मुक्त नजर आए। यूं फिल्मी दुनिया में उनका आगाज तो बचपन में ही हो चुका था। पृथ्वीराज कपूर के इस सबसे छोटे बेटे को अभिनय विरासत में मिला था। खेलने के लिए सिर्फ घर का आंगन ही नहीं था, पृथ्वीराज थिएटर भी था। नाटक करते-करते एक बच्चे ने अभिनय की पाठशाला में कब दाखिला ले लिया, उसे पता ही न चला। वो बाल कलाकार ब
उदयपुर . ‘जब-जब फूल खिले’ एक खूबसूरत और मासूम प्रेम कहानी जब पर्दे पर उतरी, तो एक मुस्कुराते हुए नायक की छवि भी दर्शकों के जेहन में उतर गई। ये थे शशि कपूर , जो कपूर खानदान से होने के बावजूद उसके असर से एकदम मुक्त नजर आए। यूं फिल्मी दुनिया में उनका आगाज तो बचपन में ही हो चुका था। पृथ्वीराज कपूर के इस सबसे छोटे बेटे को अभिनय विरासत में मिला था। खेलने के लिए सिर्फ घर का आंगन ही नहीं था, पृथ्वीराज थिएटर भी था। नाटक करते-करते एक बच्चे ने अभिनय की पाठशाला में कब दाखिला ले लिया, उसे पता ही न चला। वो बाल कलाकार बना। अपने बड़े भाई राज कपूर की फिल्मों ‘आग’ और ‘आवारा’ में भी नजर आया। शशि इतने व्यस्त थे कि दिन में तीन से चार फिल्मों की शूटिंग करते थे। अपने भाई राज कपूर को सत्यम शिवम सुंदरम’ के लिए वक्त नहीं दे पाते थे। राज साहब ने नाराज होकर उन्हें ‘टैक्सी’ कह दिया था क्योंकि शशि का मीटर हमेशा डाउन रहता था। 4 दिसम्बर 2017 को शशि जी ने आखिरी सांस ली।
Published on:
05 Dec 2017 12:02 pm
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