
शीतला सप्तमी
रविवार को रांधण छठ या रांधण पुआ मनाया गया। इसके तहत शीतला सप्तमी पूजने वाली महिलाएं रात को खाना बनाया। इसमें खट्टा- मीठा ओलिया, केर-सांगरी, कैरी की सब्जी आदि विशेष तौर पर बनाए जाते हैं। सोमवार को सप्तमी पर शीतला माता की पूजा कर ठंडे खाने का भोग चढ़ाया जाता है। महिलाएं सुबह से पूजा-अर्चना कर कथाएं सुनती हैं और दिनभर घरों में यही ठंडा खाना खाया जाता है। वहीं, मेवाड़ में अष्टमी पूजने का रिवाज है। ऐसे में महिलाएं अष्टमी पूजन करेंगी।
दशामाता व्रत 4 अप्रेल को
होली दहन के दूसरे दिन से दशामाता की कथाएं भी शुरू हो चुकी हैं । अब से दस दिन बाद महिलाएं पीपल के पेड़ की पूजा-अर्चना कर दशामाता की पूजा करेंगी। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के दिन दशामाता का पूजन किया जाता है। दशामाता का व्रत इस बार 4 अप्रेल को रखा जाएगा। इससे पूर्व महिलाएं दशामाता की पूजा कर उनकी कथाएं सुनेंगी। दशामाता व्रत के दिन महिलाएं कच्चे सूत का 10 तार का डोरा लाकर उसमें 10 गांठ लगाती हैं और पीपल वृक्ष की कुमकुम, मेहन्दी, लच्छा, सुपारी आदि से पूजा के बाद वृक्ष को सूत लपेटती हैं। पीपल के पेड़ की पूजा करती हैं। परिवार में अच्छी आर्थिक स्थिति और सुख शांति के लिए महिलाएं दशामाता की पूजा करती हैं।
Updated on:
31 Mar 2024 11:36 pm
Published on:
31 Mar 2024 11:33 pm

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