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कभी म्यूजिक से पीछा छुड़ाना चाहते थे पापोन, लेकिन म्यूजिक ने ही बनाया स्टार, यूथ के लिए ये मैसेज दिया पापोन ने..

पापोन बताते हैं , मुझे संगीत में कॅरियर बनाना है या बॉलीवुड में गाना है, ऐसा कभी नहीं सोचा था। उल्टा संगीत से पीछा छुड़ाकर भाग गया था। लेकिन जब कुछ समझ नहीं आ रहा था तो लगा कि गाना ही गा लेता हूं, 31 साल की उम्र में शुरू किया कॅरियर

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जिंदगी में भरपूर म्यूजिक है, रोमांस है। हवाओं की सरसराहट में, पानी की लहरों में, पंछियों की चहचहाहट में ये सब किसी संगीत से कम नहीं है, ये हीलिंग करती है। प्रकृति के साथ रहो, ये आपके मन को और सेहत को दोनों को संगीत से भर देगी। मुझे संगीत में कॅरियर बनाना है या बॉलीवुड में गाना है, ऐसा कभी नहीं सोचा था। उल्टा संगीत से पीछा छुड़ाकर भाग गया था। लेकिन जब कुछ समझ नहीं आ रहा था तो लगा कि गाना ही गा लेता हूं।यह कहना है सिंगर पापोन का । वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल में प्रस्तुति के लिए आए सिंगर पापोन ने राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत की। पापोन ये मोह-मोह के धागे, बर्फी, बजरंगी भाईजान, सुल्तान जैसी कई फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके हैं।उनका कहना था कि पिताजी और माताजी बहुत बड़े फनकार थे तो एक स्टार किड का दबाव मुझ पर भी था। लेकिन, मुझे लगा कि मैं इसके लिए ही बना हूं तो देर से ही सही लेकिन 31 की उम्र में करियर शुरू किया और आज आप सबके सामने हूं।

फोक, पॉप, रॉक, बॉलीवुड हर स्टाइल के गाने गाए

अंगराग महंत से पापोन बनने तक के सफर के बारे में पापोन बताते हैं कि उनका नाम अंगराग है, लेकिन घर और स्कूल में उन्हें सब पापोन ही बुलाते थे। जब दिल्ली पढ़ने गए तब वहां भी सब दोस्तों ने यही बुलाना शुरू किया। जब दो पहचान हो रही थी तो गुलजार साहब ने एक बार कहा कि आप दिखते और सुनते पापोन की तरह ही हो तो ये ही रखिए। इसलिए बस पापोन ही हो गया। उन्होंने बताया कि असम और नॉर्थ ईस्ट में रॉक म्यूजिक के प्रति बहुत आकर्षण रहा है तो उनका भी रॉक म्यूजिक के प्रति खास लगाव है। वहीं, असम के फोक के अलावा पॉप, गजल, बॉलीवुड, कोक स्टूडिया आदि कई तरह के गाने गाए हैं। उन्हें हर स्टाइल के गाने गाना पसंद है।

पिता को बीहू सम्राट बुलाते थे, वो एक फैमिली मैन थे

पापोन कहते हैं, संगीत की शुरुआत घर से ही हुई। पिता और माता दोनों ही संगीत कलाकार रहे। पिता को बीहू सम्राट बुलाया जाता था। संगीत की तालीम पिता से ही मिली। बचपन पिता के साथ ग्रीन रूम, स्टूडियो और रिहर्सल्स में ही बीता। जहां पिता को देखते-सुनते थे और कई एलपी रिकॉर्ड्स मेहंदी हसन और जगजीत सिंह के लाकर रखते थे, जिससे गजल से उनका काफी लगाव हो गया। पिता इतने बड़े कलाकार होने के बाद भी फैमिली मैन थे। मैं भी उनकी तरह घरेलू हूं और परिवार के साथ समय बिताना ज्यादा पसंद करता हूं। वे छोटी-छोटी चीजों में ही खुशी खोजते थे। मुझे भी ऐसा ही लगता है कि छोटी-छोटी बातों में ही खुशियां छुपी हैं। इसलिए हर खुशी का आनंद लीजिए। युवाओं को कहता रहता हूं कि करियर को लेकर किसी तरह का दबाव भी मत रखिए। जिस काम में अच्छे हों या जो दिल करे वही करें पूरी ईमानदारी से।

नए साल में आएंगे 4 एलबम

पापोन मानते हैं कि भले ही कम गाने गाओ लेकिन वो आपके बेहतरीन गाने हों। ये जरूरी नहीं कि बहुत से गाने गाकर ही आपको शोहरत मिले, अगर आपका काम अच्छा है तो वही आपको शोहरत दिला देगा। उन्हें घूमने का बहुत शौक है। वे परिवार के साथ अक्सर घूमने जाते रहते हैं। कोरोना का समय भी उन्होंने कई जगहों पर रहकर और घूमकर बिताया। इस दौरान कई तरह का संगीत तैयार किया। नए साल में उनका गजल का एलबम, कॉन्टेम्पररी, इंडी पॉप एलबम आने वाले हैं। हाल ही श्रेया घोषाल के साथ उनका फिल्म सर्कस में एक डुएट गाना भी रिलीज हुआ है।

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