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अगर आपको कोई कहे कि गैस, इंडक्शन या चूल्हे पर खाना नहीं बनाना है केवल प्राकृतिक तरीके से बिना लकड़ी, ईंधन के खर्च के खाना पकाना है तो कई सारे ख्याल मन में आएंगे। लगेगा कि खाना बिना गैस के कैसे बन पाएगा लेकिन इसका हल है उदयपुर की डॉ. मंजू जैन के पास। अरविंद नगर, सुंदरवास निवासी 70 वर्षीय डॉक्टर मंजू जैन पिछले 42 वर्षों से सोलर कुकर में खाना बना रही हैं। वो भी एक से बढ़कर एक डिश इस कुकर में बनाती हैं। इसके जरिये वे पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती आ रही हैं और सौर ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही हैं। इस उल्लेखनीय कार्य के लिए 'सोलर वुमन' भी कहा जाता है और प्लेटिनम शक्ति पुरस्कार से भी नवाजा गया है।
होम्योपै थिक डॉक्टर थीं, परिवार के लिए छोड़ी प्रे क्टिस
डॉ. मंजू जैन पेशे से होम्योपैथिक डॉक्टर हैं परन्तु परिवार के बीमार सदस्यों की सेवा के लिए उन्हें प्रैक्टिस छोड़नी पड़ी और उन्होंने घर की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। इस दायित्व निर्वहन में सोलर कुकर से उन्हें बहुत सहायता मिली। जहां एक ओर घर के बीमार सदस्यों की शारीरिक सेवा करनी थी वहीं उनके लिए भोजन की व्यवस्था में सोलर कुकर ने बहुत साथ दिया। वे विगत 42 वर्षों से लगातार सोलर कुकर का इस्तेमाल कर रही हैं और इसके फायदे जनसाधारण तक पहुंचाने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम करती रहीं हैं। इस प्रकार बिना लकड़ी, कोयला, गैस और बिजली खर्च करे हुए सोलर कुकर द्वारा पर्यावरण को बचाने में वे महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं।
सोलर कुकर में भोजन बनाने का देती हैं प्रशिक्षण
डॉ. मंजू जैन अभी तक 1000 महिलाओं और युवतियों को सोलर कुकर में विभिन्न व्यंजन जैसे दाल-बाटी, कढ़ी-लप्सी, इडली -सांभर, चावल, बेसन चक्की, समोसा, केक, खमण, कुकीज, छोला, राजमा, मूंगफली, काजू-बादाम सेकना, च्यवनप्राश इत्यादि बनाने की लाइव ट्रेनिंग दे चुकी हैं। सोलर कुकर पर ऑल इंडिया रेडियो द्वारा आयोजित रेडियो वार्ता के साथ ही विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों और संस्थाओं में ऑफलाइन और ऑनलाइन कार्यक्रमों द्वारा जागरूकता लाती रही हैं।
Updated on:
14 Apr 2024 10:38 pm
Published on:
14 Apr 2024 10:37 pm

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