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कितनी और मांओं को रुलाओगे, उदयपुर की झीलों में आखिर ऐसा कब तक होगा रहेगा !

फतहसागर झील में डूबे एक किशोर को बचाने के प्रयास में स्वयं का जवान बेटा खोने पर एक मां ने इसी शर्त पर कोर्ट में समझौता किया कि प्रशासन अब और किसी घर का चिराग नहीं बुझने देगा। वह झीलों पर गोताखोरों की तैनातगी के साथ चेतावनी बोर्ड लगाएगा लेकिन 5 माह के बाद इसकी पालना नहीं की। इस बीच, सात दिन पूर्व बड़ी तालाब में एक और कॉलेज छात्र student drowing in pond की जान चली गई। इस छात्र की मौत पर उसके परिजनों के साथ ही उस मां की भी आंखें नम हुई जो इनके लिए लड़ी थी। मौत के बाद वह बोली कि अपना बेटा खोया है, और को बचाने के लिए जब तक झीलों में गोताखोरों की नियुक्ति नहीं होगी तब तक लडूंगी।

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The death of the student-drowning in the badi lake of udaipur

कितनी और मांओं को रुलाओगे, उदयपुर की बड़ी झील में अब तक नहीं लगाए गोताखोर

उदयपुर . फतहसागर झील में डूबे एक किशोर को बचाने के प्रयास में स्वयं का जवान बेटा खोने पर एक मां ने इसी शर्त पर कोर्ट में समझौता किया कि प्रशासन अब और किसी घर का चिराग नहीं बुझने देगा। वह झीलों पर गोताखोरों की तैनातगी के साथ चेतावनी बोर्ड लगाएगा लेकिन 5 माह के बाद इसकी पालना नहीं की। इस बीच, सात दिन पूर्व बड़ी तालाब में एक और कॉलेज छात्र की जान चली गई। इस छात्र की मौत पर उसके परिजनों के साथ ही उस मां की भी आंखें नम हुई जो इनके लिए लड़ी थी। मौत के बाद वह बोली कि अपना बेटा खोया है, और को बचाने के लिए जब तक झीलों में गोताखोरों water diver की नियुक्ति नहीं होगी तब तक लडूंगी।

यह कहना था उस मां का जिसने पांच साल पहले अपना जवान बेटा खोया था। महिला अधिवक्ता रागिनी शर्मा के बेटे कार्तिकेय की गत 17 मार्च 2014 को होली के दिन फतहसागर में डूबे वागरिया कॉलोनी बांसवाड़ा निवासी हिमांग राठौड़ को बचाने के प्रयास में उसकी भी मौत हो गई थी। बेटे का गम भूलाकर रागिनी शर्मा ने पति अशोक शर्मा ने किसी और के घर का चिराग न बुझे इसके लिए झीलों में गोताखोरों की नियुक्ति व चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग को लेकर अधिवक्ता पराग अग्रवाल के मार्फत फेटल एक्सीडेंट एक्ट का प्रार्थना पत्र पेश किया।

इसमें जिला कलक्टर, सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता, नगर निगम जरिए आयुक्त, जिला पुलिस अधीक्षक व यूआईटी सचिव को पार्टी बनाया था। न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच लोक अदालत की भावना से मामले का निस्तारण किया। इसमें अधिवक्ता रागिनी शर्मा ने उस शर्त पर अपना वाद वापस लिया कि प्रशासन समस्त झीलों में गोताखोरों की तैनातगी करेगा। इस आदेश के 4 माह बाद भी किसी भी झील पर गोताखोरों की तैनातगी नहीं हुई, जिससे राजसमंद के गुंजोल (नाथद्वारा) निवासी हेमेन्द्रसिंह (22) पुत्र गणपतसिंह चौहान की मौत हो गई। मौके पर गोताखोर तो छोड़ों कोई चेतावनी के बोर्ड भी नहीं लगा था।

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प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के बावजूद न तो सुरक्षा संबंधी चेतावनी बोर्ड लगाए और ना ही सुरक्षाकर्मी तथा पुलिस की तैनातगी की। राज्य का दायित्व जनता के जान-माल की सुरक्षा का है। उदयपुर प्रशासन इसमें घोर लापरवाही बरत रहा है। इसके लिए वह अंतिम सांस तब लड़ते हुए अवमानना का वाद दायर करूंगी। - रागिनी शर्मा, अधिवक्ता, पीडि़ता


इनमें बनी थी सहमति
- उदयपुर शहर व समस्त झीलों पर तैराकी निषेध व पानी में तैरने पर डूबने की संभावना संबंधी सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्पष्ट अक्षरों में बड़े-बड़े बोर्ड लगाए जाएगें।
- उदयपुर की समस्त झीलों, पर्यटक स्थलों पर जहां पानी से हादसों की संभावना है, वहां सुरक्षाकर्मी तथा होमगार्ड, पुलिस, अद्र्ध सुरक्षा बल, चौकीदार आदि नियुक्त होंगे। वे तैराकी के जानकार के साथ ही हादसों से शिकार लोगों को निकालने में प्रशिक्षण प्राप्त किए हुए होंगे।
- उदयपुर की झीलों में नौका संचालन के ठेका देने के समय उसी फर्म को ठेका दिया जाएगा जिनके पास प्रशिक्षित तैराक हो, हादसा होने की स्थिति में वे डूबने वाले व्यक्ति को वे बचा सके।
- गोताखोरों की झीलों के किनारे ही नियुक्त रहेंगे जो रोका टोकी के साथ ही हादसा होने पर तुरंत मदद कर पाए।

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