उदयपुर

दो राज्यों की पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर ऐसे सलूम्बर पहुंचे थे पिता-पुत्र

- पत्रिका की सलूबंर के किशोर से विशेष बातचीत - फिलहाल कोविड-19 के पॉजिटिव वार्ड में है भर्ती

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Apr 27, 2020
दो राज्यों की पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर ऐसे सलूम्बर पहुंचे थे पिता-पुत्र

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. अहमदाबाद के राजेन्द्र पाड़ा ओड़व क्षेत्र में किराए पर रहने वाले सलूम्बर निवासी पिता-पुत्र दो दिन पहले गुरुवार को दो राज्यों यानी गुजरात व राजस्थान की पुलिस को छकाते हुए उदयपुर जिले के सलूम्बर तक आ पहुंचे थे। लॉक डाउन के दौरान बड़ा सवाल ये है कि इन दोनों को ना तो गुजरात पुलिस ने किसी चौकी पर रोका और ना ही राजस्थान पुलिस ने। ये बकायदा गुजरात-राजस्थान बोर्डर पार कर बाइक से यहां तक पहुंच गए, लेकिन ना तो आगे से आगे किसी ने इसकी रिपोर्ट तक की और ना ही किसी ने उन्हें रोका। किशोर शुक्रवर देर रात पॉजिटिव आया है उसका उपचार एमबी के कोरोना ब्लॉक में जारी है।

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सिविल हॉस्पिटल से दी थी पर्ची ...पत्रिका से विशेष बातचीत के दौरान 15 वर्षीय किशोर ने कहा कि वह 12 अप्रेल से 22 अप्रेल तक अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में भर्ती था। इसी बीच जहां वह रहते थे, वहां के लोगों को जैसे ही उनके बीमार होने की जानकारी मिली तो उनका व्यवहार ही बदल गया, वे उन्हें बड़ी बेरूखी से पेश आने लगे। इसके बाद वहां पर किशोर के पिता की चाय की थड़ी भी बंद हो गई थी, तो उन्हें यहां लौटने की जल्दी थी। किशोर ने बताया कि उन्हें सिविल हॉस्पिटल ने एक पर्ची देकर कहा था कि जहां पुलिस रोके वह दिखा देना, उस पर्ची को दिखाते हुए पिता पुत्र बाइक से सलूम्बर क्षेत्र में उनके घर तक पहुंच गए। यहां सवाल ये खड़ा होता है कि कोई भी पॉजिटिव मरीज है तो उसे कम से कम 14 दिन या 28 दिन तक भर्ती रखना होता है, ऐसे में ये दस दिन में ही हॉस्पिटल से छूट कर कैसे आ गया।

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खाने पीने का सामान तो था..किशोर ने बताया कि उनके किराए के घर में खाने-पीने का सामान तो पर्याप्त था, लेकिन पडौसियों के बेरुखे व्यवहार के कारण उन्हें यहां आना पड़ा।

- कक्षा नौवीं की परीक्षा देने के बाद पिता की मदद के लिए ये किशोर अहमदाबाद गया था। उसने पत्रिका से बातचीत में बताया कि वह जब भर्ती था तो उसे दवा में गोली दी थी, यहां जो गोली उसे दी है, वह अलग है।

- किशोर ने बताया कि जब वह अहमदाबाद से सलूम्बर गए थे, तब उन्हें दो बार हॉस्पिटल बुलाया था, पहले अहमदाबाद से आते ही सलूम्बर हॉस्पिटल चले गए थे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने कुछ दवा दी और गर्म पानी पीने के लिए कहा, 14 दिन तक बाहर निकलने से मना किया, इसके बाद वह घर चले गए, लेकिन कुछ देर बाद उन्हें हॉस्पिटल बुलाया गया, वह करीब 15 किलोमीटर दूर अपने घर से वापस हॉस्पिटल पहुंचे थे।

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डॉक्टर ने पूछा कि तुमने क्यों नहीं बताया कि अहमदाबाद में भर्ती थे जब पिता पुत्र सलूम्बर दूसरी बार हॉस्पिटल पहुंचे तो डॉक्टर ने उनसे पूछा कि उसने ये क्यों नहीं बताया कि वह अहमदाबाद में भर्ती था। इस पर किशोर ने उनसे कहा कि किसी ने पूछा नहीं और उसने किसी को बताया नहीं।

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-टिकटॉक वीडियो बनाकर बिताता है समय - किशोर ने बताया कि वह बोर होने से बचने के लिए टिकटॉक वीडियो बनाकर टाइमपास करता है। यू ट्यूब पर कुछ वीडियो देखकर भी उसे अच्छा लगता है।

- पिता पुत्र को एक व अन्य परिजनों को दूसरी एम्बुलेंस में एमबी हॉस्पिटल लाया गया था।

Published on:
27 Apr 2020 01:31 pm
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