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महाभारत पर करीब 350 साल पहले 4700 मिनिएचर पेंटिंग्स बनाई जा चुकी हैं। अब तक महाभारत पर इतनी पेंटिंग्स कहीं नहीं बनी है। इनकी खासियत ये है कि ये मेवाड़ स्कूल ऑफ पेंटिंग शैली की हैं। इन कलाकृतियों को बनाने वाले कलाकार अल्लाह बख्श थे, जिन्होंने महाराणा जयसिंह के काल में 1680-1698 में इन्हें बनाया। हाल ही दिल्ली में 'महाभारत-द मिनिएचर पेंटिंग्स बाय अल्लाह बख्श' नाम की पुस्तक का विमोचन किया गया। जो करीब 2000 पेंटिंग्स पर तैयार की गई है। इसे 5 खंडों में प्रकाशित किया गया है। इस पुस्तक के पीछे मेवाड़ के राजस्थानी कवि व अनुवादक पद्मश्री चंद्रप्रकाश देवल और अनुवादक आलोक भल्ला का योगदान है। वहीं, अब ये पुस्तक उदयपुर के सरकारी संग्रहालय में भी पहुंच चुकी है।
8 वर्षों की मेहनत के बाद तैयार हुई पुस्तक
पद्मश्री चंद्रप्रकाश देवल ने बताया कि इन पेंटिंग्स को सहेजने के लिए इसे एक पुस्तक के रूप में लाने पर बहुत पहले से ही विचार कर लिया था। 2016 से इस पर काम शुरू किया। लगभग 8 साल लग गए इसे इस रूप में लाने के लिए। 350 साल पहले महाराणा जयसिंह और अल्लाह बख्श दोनों को ही संस्कृत नहीं आती थी तो पहले महाभारत का संस्कृत से कृष्णचंद भट्ट ने मेवाड़ी में अनुवाद किया। इसके बाद इस आधार पर अल्लाह बख्श ने चित्रण किया, जो ऐतिहासिक है। वहीं, बाद में आलोक भल्ला ने इसे अंग्रेजी और उन्होंने (देवल ने) हिंदी में अनूदित किया।
सह अस्तित्व का संदेश देती है पेंटिंग्स
देवल ने बताया कि पहले खंड की पहली पेंटिंग में एक कुत्ते को आवारा जानवरों के झुंड के बीच दिखाया गया है, जो यज्ञ स्थल में प्रवेश करता है। एक व्यक्ति कुत्ते को मारता है, वो कुत्ता जाकर अपनी मां से शिकायत करता है कि बिना किसी गलती के उसे पीटा गया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। कुत्ते को नहीं पता कि यज्ञ क्या होता है। तब मां कुत्ते ने आकर उस आदमी को श्राप दिया। कहानी का नैतिक सिद्धांत अहिंसा और सभी प्राणियों का सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व है। इसी तरह अंतिम खंड में युधिष्ठिर के साथ स्वर्ग के द्वार पर प्रवेश करते हुए कुत्ते की पेंटिंग है, जो फिर से दर्शाता है कि सभी प्राणी श्रेष्ठ हैं।
Updated on:
15 Oct 2023 02:11 pm
Published on:
15 Oct 2023 02:10 pm
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