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सरकारी कागजों में शहर की जनसंख्या 5 लाख पार, बढ़ गए 1.35 लाख

निगम सीमा के 80 वार्डों में सबसे बड़ा -76 और सबसे छोटा वार्ड-59, बी-2 श्रेणी का दर्जा प्राप्त करने वाले शहरों की सूची में उदयपुर हुआ शामिल, निगम ने वर्ष 2011 की जनगणना का लिया आंकड़ा, हकीकत में 7 लाख पार

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उदयपुर. नगर निगम में शहरी सीमा बढऩे के साथ ही हम वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अब अधिकृत रूप से सरकारी कागजों में 5 लाख के पार हो चुके हैं। पहले 70 वार्डों में हमारी जनसंख्या 4.51 लाख थी। पेराफेरी के 33 गांव और जुडऩे से यह आंकड़ा 5 लाख 54 हजार 554 हो गया। 10 नए वार्ड जुड़ने से एकाएक शहरी सीमा की जनसंख्या में एक लाख 35 हजार 554 लोगों का इजाफा हुआ। निगम सीमा के 80 वार्डों में सबसे बड़ा वार्ड -76 है, वहीं सबसे छोटा-59 होगा। नई जनसंख्या में पांच लाख का आंकड़ा पार होने से अब बी-2 श्रेणी का दर्जा प्राप्त करने वाले शहरों की सूची में शामिल हो गए हैं।

राज्य सरकार ने 55 साल बाद नगर निगम की शहरी सीमा का विस्तार करते हुए 19 पंचायतों के 33 गांवों को शामिल किया। निगम टीम ने इन गांवों की जनसंख्या को शहरी सीमा में शामिल करते हुए यह आंकड़ा 5 लाख के पार पहुंचाया। इसके साथ 10 नए वार्ड का गठन करते हुए प्रत्येक की जनसंख्या निकाली। नए वार्डों का एरिया पेराफेरी गांव से ही लगते कई वार्डों में ही शामिल होने से कई वार्डों का दायरा व जनसंख्या बढ़ गई। जनसंख्या में वार्ड-1 बडग़ांव और अंतिम वार्ड- 80 बेदला के शामिल करने से पूरे शहर के सभी वार्डों के नम्बर व रहवासियों के पते बदल गए हैं।

इन 33 गांवों को शामिल करने से बढ़ी जनसंख्या

बडग़ांव, हवाला कला, हवाला खुर्द, बेदला, बेदला खुर्द, भुवाणा, रूपनगर, सापेटिया, सुखेर, शोभागपुरा, रेबारियों का गुड़ा, रघुनाथपुरा, सीसारमा, बलीचा, धोल की पाटी, सवीनाखेड़ा, नेला, जोगी तालाब, देवाली, बिलिया, फांदा, तीतरड़ी, गुखर मगरी, देबारी, झरणों की सराय, धोलीमगरी, बेड़वास, रकमपुरा, कलड़वास, मनवाखेड़ा, कानपुर, आयड़ ग्रामीण, देवाली (फतहपुरा)।

राजस्थान पत्रिका की मुहिम

राजस्थान पत्रिका ने शहरी सीमा के विस्तार को लेकर निगम मांगें विस्तार, सुविधाओं की दरकार को लेकर अभियान चलाते हुए सिलसिलेवार खबरें चलाई थी। खबरों के बाद निगम आयुक्त रामप्रकाश के निर्देशन में राजस्व शाखा की टीम ने सर्वे कर प्रस्ताव बनाते हुए जिला कलक्टर को भेजा था। कलक्टर अरविंद पोसवाल ने इसे राज्य सरकार को भिजवाया। मंथन के बाद सरकार ने शहरी सीमा के विस्तार पर मुहर लगाई थी।