
उदयपुर . आपका निजी वाहन अगर 8 सीटर है तो वह ओमनी बस यानी ट्रांसपोर्ट व्हीकल के अधीन आता है और आपको फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होगा, लेकिन कोई बीमा कंपनी महज फिटनेस के आधार पर आपका क्लेम निरस्त नहीं कर सकती है।
स्थायी लोक अदालत ने ऐसे ही एक प्रकरण में फिटनेस के आधार पर खारिज किए क्लेम को आधारहीन माना। अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व बृजेन्द्र सेठ ने चित्रकूटनगर भुवाणा निवासी दिलीप कुमार पुत्र कप्पूसिंह बनाम बापूबाजार स्थित दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड जरिए मंडलीय प्रबंधक व एकलिंगगढ़ गोवर्धनविलास रोड स्थित चन्द्रा टोयटो आर.एस.मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रकरण में परिवादी के वाहन को टोटल लॉस माना। न्यायालय ने विपक्षी को आदेश दिया कि वह परिवादी को दो माह में 7.50 लाख, आवेदन तारीख से आदेश तक 10 प्रतिशत ब्याज व मानसिक, शारीरिक व आर्थिक व्यय के 25 हजार रुपए अलग से अदा करे।
आठ सीटर को माना ओमिनी बस
केन्द्र सरकार के 5 नवम्बर 2004 के नोटिफिकेशन के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम की धारा 41 (4) के अधीन ओमिनी बस को ट्रांसपोर्ट व्हीकल होना मान लिया गया। इसके अनुसार चालक सहित सात व्यक्तियों से अधिक सीटिंग केपिसिटी के वाहन ओमनी माना गया है। इस प्रकरण में भी सीटिंग केपिसिटी आठ होने की परिस्थिति में फिटनेस सर्टिफिकेट भी प्राथमिक रुप से आवश्यक हो जाता है। इस वाहन का पूर्व में फिटनेस था, लेकिन बाद में वह खत्म हो गया। केवल फिटनेस के आधार पर ही क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण में विपक्षी साबित करने में विफल रहा वाहन फिट नहीं होने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
यह था मामला
परिवादी दिलीप कुमार का कहना है कि उसने 6 मई 2013 को इनोवा कार क्रय कर विपक्षी बीमा कंपनी से बीमा करवाया। इसमें बिना किसी कटौती के 10 लाख रुपए ओडी क्लेम का भुगतान करने की शर्त थी। बीमित अवधि के दौरान ही कार बेकरिया क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होकर पूरी क्षतिग्रस्त हो गई। बीमा कंपनी ने फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होने व वाहन का व्यावसायिक उपयोग होना बताते हुए बीमा क्लेम अस्वीकार कर दिया था।
Published on:
02 Jan 2018 08:00 am
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