
मुख व गले के कैंसर का उपचार अब भी परंपरागत
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. लगातार बढ़ते हेड नेक (मुंंह व गले) कैंसर का अब भी एमबी हॉस्पिटल में परम्परागत तरीके से ही उपचार चल रहा है। नाक कान व गले (इएनटी) में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन यहां उनके उपचार सर्जरी ही है। हालात यह है कि मरीज या तो सर्जरी करवाते हैं या कार्बन डाई आक्साइड लेजर उपचार के लिए अपनी जेब ढीली कर जयपुर या अहमदाबाद की राह पकड़ते हैं।
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तीन साल में सात सौ से अधिक मरीजतीन साल में हेड नेक के कैंसर के एमबी हॉस्पिटल में करीब सात सौं से अधिक सर्जरी हो चुकी है। यहां पहुंचे मरीजों की संख्या तो एक हजार से पार थी। ये लेजर मशीन यानी कार्बन डाइ आक्साइड लेजर गले या मुंह के कैंसर में ट्यूमर को जला कर निकाल देता है, जबकि अभी एमबी हॉस्पिटल में चीरा लगाकर सर्जरी से काम चलाया जा रहा है। सर्जरी में औसतन 4 से 5 घंटे लगते हैं। कई बार तो सुबह से शाम यानी सात घंटे से अधिक समय लग जाता है। यदि लेजर मशीन हो तो दो से तीन घंटे में इस प्रक्रिया को अपनाकर लेजर ऑपरेशन किया जा सकता है। इससे डॉक्टरों का काफी समय बच सकता है। इस लेजर मशीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपए है। इसे किसी भी मरीज के मुंह या गले के ट्यूमर पर टारगेट कर इसे जलाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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प्रत्येक मरीज को लगता है 50 हजार से दो लाख तक का फटकाजो मरीज यहां सर्जरी नहीं करवाकर जयपुर, अहमदाबाद या अन्य बाहरी किसी निजी हॉस्पिटल में लेजर उपचार के लिए पहुंचता है तो उसे 50 हजार रुपए से लेकर करीब दो लाख रुपए तक का फटका लगता है। यह मशीन यहां नाक, कान व गला (इएनटी) विभाग में मरीजों की संख्या को देखते हुए जरूरी मानी गई है, लेकिन इसे अभी तक यहां नहीं लाया गया है।
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ये है बड़ी परेशानी
एक करोड़ की लागत की इस मशीन को आरएमआरएस के माध्यम से लगवाया जा सकता है। अगर कोई जनप्रतिनिधि यदि आगे आता है तो अपने मद से इसे यहां शुरू करवा सकता है।
इसे लेकर मेडिकल कॉलेज प्रस्ताव बनाने की चर्चा कर रहा है, लेकिन फिलहाल कागजी काम शुरू नहीं हुआ है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज परिसर में जल्द ही सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक शुरू होने वाला है, लेकिन परेशानी यह है कि इएनटी को सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक में शुमार नहीं किया जाता।दिया है सुझाव हमने इसके लिए पहले आरएनटी प्रशासन को सुझाव दिया है। ये मशीन यहां बेहद जरूरी है। यदि कॉलेज को यह मशीन मिल जाती है तो मरीजों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। यहां इस बीमारी के मरीजों की संख्या खूब है।
डॉ. नवनीत माथुर, विभागाध्यक्ष, इएनटी
Published on:
08 Feb 2020 12:47 pm

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