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उदयपुर

Tribal Area News : आदिवासी क्षेत्र कोटड़ा उपखंड मुख्यालय के अस्पताल नहीं है डॉक्टर, हर मर्ज का उपचार, रेफर टू गुजरात

मजबूरी में गुजरात या उदयपुर रेफर करना ही विकल्प

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उदयपुर जिले के कोटड़ा उपखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीते कई वर्षों से डॉक्टरों की राह देख रहा है। जिला मुख्यालय से 120 किमी दूर कोटड़ा सीएचसी में सीनियर डॉक्टरों और विशेषज्ञों के सभी पद रिक्त होने से चिकित्सा सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को सामान्य या गंभीर बीमारी या एक्सीडेंट होने पर रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
एक्सीडेंट या गंभीर बीमारी में आपात स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल की दूरी ज्यादा होने से परिजन मरीजों को इलाज के लिए नजदीकी ईडर, हिम्मतनगर, गुजरात रेफर कर ले जाते हैं। जहां उपचार के दौरान उन्हें मोटी कीमत चुकानी पड़ती है और सरकारी चिरंजीवी योजना का लाभ भी नहीं मिल पाता।
नर्स या मेल नर्स ही करवाते हैं प्रसव
सीएचसी पर सोनोग्राफी मशीन नहीं होने से यहां के मरीजों को 100 किलोमीटर दूर हिम्मतनगर गुजरात या 120 किमी उदयपुर जाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के लिए गायनोलोजिस्ट का पद भी वर्षों से रिक्त चल है। गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी भी नर्स या मेल नर्स ही करवाते हैं।
रोजाना की ओपीडी 200 से अधिक
उपखंड मुख्यालय पर लगभग 68 हजार जनसंख्या निवास करती है। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य कोटड़ा में रोजाना की ओपीडी 200 से 250 के करीबन रहती हैं। वही मौसमी बीमारियों के दौरान 300 से ऊपर ओपीडी रहती है।
डॉक्टरों के यह पद रिक्त
कोटड़ा सीएचसी केंद्र पर डॉक्टरों के सभी पद रिक्त है। जिसमें एक सीनियर मेडिकल ऑफिसर, एक मेडिकल ऑफिसर, एक पद सामान्य रोग विशेषज्ञ, एक बाल रोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन डॉक्टर सहित सभी पद रिक्त है।
पैरामेडिकल स्टाफ के आधे पद खाली
कोटड़ा सीएचसी पर पैरामेडिकल स्टाफ के पद भी आधे खाली चल रहे हैं। जिसमें जीएनएम प्रथम श्रेणी स्वीकृत 2 की तुलना में 1 पद रिक्त है। द्वितीय श्रेणी के सभी 5 पद रिक्त है। लैब टेक्नीशियन का 2 में से एक व एएनएम के 2 में से 1 पद रिक्त है। फार्मासिस्ट का एक स्वीकृत व वार्डबॉय के दो स्वीकृत पद रिक्त है।
संविदा पर लगे डॉक्टरों का कार्यकाल 31 मार्च को हो रहा समाप्त
वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बेकरिया सीएचसी और मांडवा पीएचसी से लगाए अस्थायी संविदाकर्मी डॉक्टर कोटड़ा सीएचसी पर सेवाएं दे रहे हैं। 31 मार्च को उनका भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में यदि कोटड़ा सीएचसी पर शीघ्र डॉक्टरों के पद नहीं भरे गए तो चिकित्सा व्यवस्था डगमगा सकती हैं।
झोलाछाप कूट रहे चांदी
कोटड़ा मुख्यालय पर झोलाछाप, नीम हकीमों की संख्या में बीते वर्षों में काफी बढ़ोतरी हुई है। यहां इन्हें कोई रोक टोक व किसी प्रकार की जांच धरपकड़ अभियान नहीं होने से ये बेखौफ होकर अपना कारोबार जमा बैठे हैं।

डॉक्टरों की कमी को लेकर मीटिंग में समय समय पर जिला कलक्टर और जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को अवगत करवाया है। दूर दराज का इलाका होने के कारण कई डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ कुछ समय बाद ट्रांसफर करवाकर यहाँ से चले जाते है। वैकल्पिक व्यवस्था से ही डॉक्टरों की पूर्ति की जा सकती हैं।
शंकरलाल चव्हाण, ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी