देवस्थान विभाग के अंतर्गत आने वाला श्री जगन्नाथ राय मंदिर मेवाड़ ही नहीं अपितु पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। विभाग की उपेक्षा के चलते यहां सेवा-पूजा करना भी मुश्किल हो रहा है। मंदिर में नित्य काम आने वाली ऐतिहासिक श्रंगार की सामग्री सहित अन्य संसाधन क्षत-विक्षत हो गए हैं।
उदयपुर . देवस्थान विभाग के अंतर्गत आने वाला श्री जगन्नाथ राय मंदिर मेवाड़ ही नहीं अपितु पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। विभाग की उपेक्षा के चलते यहां सेवा-पूजा करना भी मुश्किल हो रहा है। मंदिर में नित्य काम आने वाली ऐतिहासिक श्रंगार की सामग्री सहित अन्य संसाधन क्षत-विक्षत हो गए हैं। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
यह आरोप पुजारी परिषद ने गुरुवार विभिन्न संगठनों के साथ हुई बैठक में लगाया। परिषद के हेमेंद्र पुजारी ने बताया कि देवस्थान विभाग को सुपुर्दगी से पूर्व मंदिर में पुजारियों के अलावा 25 सेवादार कार्यरत थे। आज एक भी सेवादार नहीं है। वहीं आभूषणें के साथ ही पूजा सामग्री घंटी, मांदल, आरती एवं भोग बनाने के बर्तन आदि, जो वर्षों से उपयोग में लिए जा रहे हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी देवस्थान विभाग की है। वक्त के साथ ये घीस कर टूट रहे हैं। मंदिर में होने वाले बड़े आयोजनों में भी देवस्थान विभाग श्रंगार की विशेष सामग्री पुजारियों को नहीं देता। आभूषणों की सार संभाल भी नहीं की जा रही। नियमित रखरखाव नहींं होने से मंदिर जीर्णशीर्ण हो रहा है। बैठक में परिषद के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि विभाग द्वारा मंदिर परंपरानुसार सभी व्यवस्थाएं नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
इस दौरान रामगोपाल पुजारी, गजेंद्र पुजारी, दिनेश मकवाना, कमलेंद्र सिंह पंवार, रविकांत त्रिपाठी, राजेंद्र श्रीमाली सहित कई संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे।