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आबकारी पॉलिसी फेल: प्रदेश में स्वत: ही ड्राई .डे

आबकारी पॉलिसी फेल: प्रदेश में स्वत: ही ड्राई .डे

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liquor shops Panchayat election

मोहम्मद इलियास/उदयपुर

राजस्थान में आबकारी की नई पॉलिसी पूरी तरह फेल हो गई है। नवीनीकरण व नीलामी की बार.बार बोली लगाने के बावजूद राज्य में 7665 में से 3176 दुकानें ही उठ पाई है। अभी भी 4489 दुकानों पर कोई बोलीदाता नहीं आया है। राज्य के प्रत्येक जिले में नीलामी में बाकी रह गई दुकानों से ड्राई.डे घोषित हो गई। कई जगह दुकान लेने वाले पड़ोसी ठेकेदार ब्रांच खोल शराब बेच रहे हैं तो कुछ जगह अवैध व बाहरी राज्यों की मदिरा बिक रही है। शराब कारोबारियों का मानना है कि जितनी दुकानें खाली रहेगीए उतनी ज्यादा अवैध मदिरा बिकेगी और सरकार को राजस्व की चपत होगी।
पूरे प्रदेश में 7665 दुकानों में से 2556 दुकानों का ही नवीनीकरण हो पाया है। बची 5109 दुकानों के लिए प्रदेशभर में अलग.अलग चरण में बोली लगाई गईए लेकिन 620 दुकानें ही उठी। गौरतलब है कि राज्य में आबकारी का सालाना करीब 15 हजार करोड़ का राजस्व हैए जो नई पॉलिसी के बाद अब तक पटरी पर नहीं आ पाया।
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आबकारी नीति के फेल होने के प्रमुख कारण
. आबकारी नीति वर्ष 2021.22 के निर्धारण से पूर्व राज्य में पदस्थापित अनुभवी जिला आबकारी व सहायक आबकारी अधिकारियों से कोई विचार.विमर्श नहीं किया।
. आबकारी नीति वर्ष 2021.22 के लिए जिन अधिकारियों ने सुझाव दिएए उन पर विचार विमर्श ही नहीं किया।
. भानिवि मदिराध्बीयर की तर्ज पर ही देशी मदिरा के परमिट जारी करने का सम्पूर्ण अधिकार आरएसजीएसएम को दिए जाने से मदिरा अनुज्ञाधारियों के द्वारा उनकी बिक्री की क्षमता के अनुसार मदिराध्बीयर का उठाव किया गया। किसी भी मदिरा अनुज्ञाधारियों को उनकी मासिक गारंटी की नहीं दी गईए इस कारण सम्पूर्ण राज्य में 70 से 80 प्रतिशत मदिरा दुकानों में भारी भरकम कमी रही।
. राज्य में बड़ी ग्राम पंचायतोंए जिनमें एक से अधिक मदिरा दुकानें वित्तीय वर्ष 2020ण्21 में आवंटित भी तोडकऱ मदिरा समूहों को भंग कर छोटी.छोटी मदिरा दुकानें कर दी गईए जिससे बड़ी ग्राम पंचायतों में अवस्थित छोटी मदिरा दुकानों का तो बन्दोबस्त हो गया तथा महंगी दुकानें पड़त में रह गई। बाद में आबकारी विभाग को रिजर्व प्राइज में 65 से 70 प्रतिशत तक की राशि कम करके घाटे में पुनरू बन्दोबस्त किया गया।
. वित्तीय वर्ष 2021ण्22 मे सम्पूर्ण राज्य मे अप्रत्याक्षित वृद्धि कर दुकानों की बोलियां लगाई गईए जिनमे अधिकांश लोग बैक आउट हो गए। सम्पूर्ण राज्य में अधिकांश दुकानें बाकी रह गई।
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शराब कारोबारियों के अनुसार यह किया जाए
. राज्य में मदिराध्बीयर की आबकारी ड्यूटी में वृद्धि की जाएए जिससे की मदिरा अनुज्ञाधारी को कम मदिराध्बीयर का उठाव करना पड़ा।
. अनुज्ञाधारियों द्वारा देशी मदिरा एवं आरएमएल की मासिक गारंटी में कमी रखे जाने पर उनसे बेसिक लाइसेंस फीस वसूल नहीं की जाए। मासिक गारंण्टी पूर्ति के स्थान पर त्रैमासिक गारंटी पूर्ति का प्रावधान रखा जाए।
. आबकारी नीति 2022.23 एवं 2023.24 में समस्त मदिरा की आबकारी शुल्क व अतिरिक्त आबकारी शुल्क को एक समान किया जाए।
. आरएसजीएसएम के द्वारा जबरदस्ती दिए जाने वाले माल के राइडर को हटाया जाए।
. प्राइवेट कंपनियों द्वारा उनके माल की मात्रा हर वर्ष बढ़ाया जा रहा हैए जबकि उसका उपयोग करने वालों की कमी है। इस माल को नियंत्रण किया जाए।
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