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मोहम्मद इलियास उदयपुर
रिश्वत के 17 साल पुराने एक प्रकरण में आरोप सिद्ध होने पर न्यायालय ने पंचायत समिति सराड़ा के तत्कालीन ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी को एक वर्ष की कैद व 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
एसीबी चित्तौडगढ़़ की टीम ने गत 21 अक्टूबर 2005 को सेवानिवृत्त ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी पंचायत समिति सराड़ा हाल तितरड़ी निवासी प्रभाकर पुत्र भंवरलाल शर्मा अम्बाला (सराड़ा) विद्यालय प्रबंध समिति के सचिव धर्मा मीणा से 8 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। चालान पेश होने पर विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश पारीख ने आवश्यक साक्ष्य व दस्तावेज पेश किया। आरोप सिद्ध होने पर विशिष्ट न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) संख्या-2 के पीठासीन अधिकारी- वीरेन्द्र कुमार जसूजा ने आरोपी प्रभाकर शर्मा को धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अपराध के लिए एक वर्ष के साधारण कारावास व दस हजार के अर्थदंड से दंडित किया। धारा 13 (1)(डी) 13(2) में एक वर्ष के साधारण कारावास व दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने अपने निर्णय के दौरान लिखा कि वर्तमान समय में लोक सेवकों द्वारा अपने विधिक दायित्व का निर्वहन न कर वैद्य कार्य करने की एवज में अनुचित व अवैध रूप से वैद्य पारिश्रमिक से भिन्न रिश्वती राशि मांग कर प्राप्त करने की प्रवृति दिनोंदिन बढ़ रही है। हस्तगत प्रकरण मे भी अभियुक्त प्रभाकर शर्मा ने रिश्वत ली ऐसे में दंडित करना न्यायोचित है।
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यह था मामला
परिवादी ने गत 19 अक्टूबर 2005 को एएसपी एसीबी चित्तौडगढ़़ को रिपोर्ट दी थी। बताया कि अम्बाला स्कूल के निर्माण कार्य में प्रेमशंकर मीणा अध्यापक रोडे अटकाता है, जिसके स्थानांतरण के लिए सभी गांवों ने मिलकर ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी को दो माह पहले शिकायत की थी। इस संबंध में परिवादी बीइओ से पांच बार मिला तो उन्होंने निर्माण कार्य में कमीशन व हेडमास्टर को बचाने के लिए पांच हजार एवं प्रेमशंकर अध्यापक के स्थानांतरण के लिए एवज में तीन हजार सहित कुल 8 हजार की मांग की। सत्यापन पुष्टि के बाद एसीबी टीम ने आरोपी प्रभाकर शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
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Published on:
19 Nov 2022 09:17 am
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