16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छत्तीसगढ़ की मुमुक्षु कुमकुम आज कानोड़ में लेगी जैन दीक्षा

निकाला वरघोड़ा, परिजनों सहित बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल जैन आचार्य रामलाल के सान्निध्य में होगा दीक्षा महोत्सव का आयोजन

2 min read
Google source verification
छत्तीसगढ़ की मुमुक्षु कुमकुम आज कानोड़ में लेगी जैन दीक्षा

छत्तीसगढ़ की मुमुक्षु कुमकुम आज कानोड़ में लेगी जैन दीक्षा

कानोड़.(उदयपुर). शिक्षा नगरी कानोड़ के इतिहास में अध्यात्म को लेकर एक नया अध्याय रविवार को छत्तीसगढ़ की मुमुक्षु कुमकुम कोटड़िया (जैन) की दीक्षा के साथ ही जुड़ जाएगा। नगर में बिराजित अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन श्रावक संघ के आचार्य रामलाल महाराज के सान्निध्य में छत्तीसगढ़ की रहने वाली मुमुक्षु कुमकुम कोटड़िया 28 मई को जैन भागवती दीक्षा ग्रहण करेगी । दीक्षार्थी परिवार के बड़ी संख्या में परिजन कानोड़ पहुंच चुके हैं, वही देशभर से हजारों लोग इस कार्यक्रम में जुड़ेंगे और दीक्षा महोत्सव को सफल बनाएंगे। आयोजन के तहत शनिवार को नगर के गांधी चौक से वरघोड़ा निकाला गया, जो नगर के मुख्य मार्गों से होते हुआ पुनः जैन पंचायती नोहरे पहुंचा, जहां प्रवचन हुए । वरघोड़े के दौरान मुमुक्षु कुमकुम को बग्गी में बिठाया गया। दीक्षा के 1 दिन पूर्व सजी-धजी मुमुक्षु को देख कई लोगों के आंसू छलक उठे। वहीं, वरघोड़े में मुमुक्षु कुमकुम के परिजन सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए । नगर के जवाहर विद्यापीठ जैन शिक्षण संस्थान में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, इसकी तैयारियां पूर्ण हो चुकी है । साधुमार्गी जैन संघ, समता युवा संघ , समता महिला मंडल, समता बहू मंडल सहित तमाम मंडलों की बैठकों के दौर के साथ ही व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है । नगर में पहली बार हो रहे दीक्षा कार्यक्रम को लेकर समाज जनों के साथ ही नगर में खासा उत्साह है। आयोजन को लेकर बड़ी संख्या में साधु संतों के साथ ही देशभर के हजारों लोग कानोड पहुंचेंगे और इस दीक्षा महोत्सव के साक्षी बनेंगे ।

दीक्षार्थी कुमकुम का जीवन परिचय

दीक्षार्थी कुमकुम कोटडिया का जन्म 6 अगस्त, 2002 को धमतरी छत्तीसगढ़ में माता-पिता संजू देवी कमलेश कोटडिया के घर हुआ । कुमकुम के पिता कमलेश कोटड़िया के कपड़े का व्यापार है । दीक्षार्थी कुमकुम 12वीं तक शिक्षा ग्रहण कर चुकी है। वैराग्य काल के 5 वर्ष में 9 की तपस्या व साधु संतों के साथ लगभग 700 किलोमीटर पैदल यात्रा कर चुकी है। मुमुक्षु कुमकुम धार्मिक शिक्षा के रूप में आरूग्गबोहिलाभं , जैन सिद्धांत भूषण, कोविंद तीन भाग , आगम कंठस्थ भूषण व गोविंद प्राप्त कर चुकी है ।


बड़ी खबरें

View All

उदयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग