स्कूलों में मिड डे मील की गुणवत्ता हो रही है प्रभावित बाजार मूल्य के अनुसार नहीं मिल रही कुकिंग कन्वर्जन राशि
भूपेंद्र सरवार
झल्लारा. मिड डे मील योजना के तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के सभी बच्चों को प्रतिदिन मध्याह्न भोजन दिया जाता है , ताकि स्कूलों में बच्चे रोजाना आएं और उन्हें पर्याप्त पोषण मिलता रहे, लेकिन बढ़ती महंगाई ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की थाली का बजट बिगाड़़ दिया है। महंगाई की वजह से प्रदेश के 70 लाख विद्यार्थियों की मिड डे मील की थाली खाली होने लगी है। बात अगर अकेले सलूम्बर जिले की करें तो यहां भी हजारों बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं !
दाल और सब्जी में पानी ज्यादा
हरी सब्जियां महंगी होने के चलते बच्चों को प्रतिदिन दोपहर में मिलने वाले भोजन में हरी सब्जियां गायब होने लगी है। सब्जियों के अलावा तेल, दाल और गैस के साथ मसालों के दाम भी पिछले 1 साल में काफी बढ़े हैं, लेकिन मिड डे मील योजना की लागत मूल्य में बाजार मूल्य में बढ़ोतरी नहीं होने से शिक्षक एवं संस्था प्रधानों के समक्ष बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण भोजन उपलब्ध कराना चुनौती बना हुआ है। ऐसे में बच्चों को कहीं रोटी कम तो कहीं दाल सब्जी में पानी ज्यादा मिल रहा है। फल तो लगभग बंद ही हो गए हैं। खाद्य सामग्री के भाव तो आसमान छू रहे हैं। दो वर्ष बाद अक्टूबर 2022 में बढ़ाई गई कुकिंग कन्वर्जन राशि ऊंट के मुंह में जीरा कहावत को चरितार्थ कर रही है। गुणवत्ता पूर्ण भोजन उपलब्ध नहीं करा पाने से शिक्षकों में परेशानी एवं अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है। विभागीय अधिकारी अपने निरीक्षण एवं एमडीएम की गुणवत्ता परखने पर भी खूब जोर देते हैं लेकिन बच्चों के भोजन के लिए मिलने वाली धन राशि में बढ़ोतरी हो उस पर उच्च अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट नहीं किया जाता है।
सप्ताह में दो बार हरी सब्जी परोसना तय
शिक्षा विभाग ने सोमवार से शनिवार तक अलग मीनू निर्धारित किया है, इसके तहत सोमवार को रोटी सब्जी, मंगलवार को नमकीन दाल चावल, बुधवार को दाल रोटी, गुरुवार को खिचड़ी और शुक्रवार को दाल रोटी और शनिवार को सब्जी रोटी ! बच्चों को खिलाई जाती है ! ऐसे में सप्ताह में 2 दिन बच्चों को कुपोषण दूर करने के लिए प्रोटीन व विटामिन युक्त हरी सब्जियां व दाल बनाई जाती है !
शिक्षा विभाग से ही मिलती है राशि
शिक्षा विभाग की ओर से पोषाहार सामग्री के लिए कक्षा 1 से 5 तक के 5.45 रुपए तथा कक्षा 6 से 8 तक छात्र को 8.17 रुपए प्रति छात्र भुगतान मिलता हैख् इसमें तेल, दाल, मिर्च, मसाला, व गैस सिलेंडर आदि शामिल है। इसी राशि में से प्रति छात्र पचास पैसे प्रतिदिन के हिसाब से साप्ताहिक फल भी दिया जाता है। ऐसे में महंगाई के चलते यह नाकाफी है।
यह है प्रति बालक खाद्य सामग्री की मानक मात्रा
खाद्य सामग्री: प्रा. स्तर उप्रावि. स्तर
गेहूं/चावल: 100ग्राम, 150ग्राम
दाल: 20ग्राम -30ग्राम
सब्जी: 50ग्राम -75 ग्राम
घी/तेल: पांच मिली.7.5 मिलीग्राम
नमक: पांच ग्राम -सात ग्राम
मसाला: आवश्यकता अनुसार
*सूखी सामग्री के भाव किलो में*
हरी मूंग दाल- 100 रुपए किलो
तेल: 110 रुपए प्रति किलो
मिर्ची: 260 से 300 रुपए तक किलो
हल्दी: 160 रुपए प्रति किलो
जीरा:700से 750 रुपए प्रति किलो
इन दिनों सब्जियों के ये हैं भाव
टमाटर 240 रुपए किलो, पालक बीस रूपए किलो, प्याज बीस रुपए, भिंडी तीस रुपए, हरी मिर्च 80 रुपए, पत्ता गोभी 40 से 50 रुपए किलो, करेला चालीस से पचास रुपए तक किलो, लौकी 40 रुपए किलो
चार से छह माह में आता है पैसा
एक शिक्षक ने बताया कि इतनी महंगाई और सरकार की ओर से कम राशि मिलने के बाद भी हर बार राशि चार से छह माह बाद आती है। अभी लास्ट राशि मार्च में आई थी, वह भी फरवरी तक की ही थी। ऐसे में समस्या और बढ़ जाती है। कई बार तो दुकानदार भी उधार सामान देने से मना कर देते हैं। या हमारी जेब से भुगतान कर सामान खाद्य सामग्री लाकर व्यवस्था करनी पड़ती है।
इनका कहना है
वर्तमान में सब्जी, मिर्च, मसाले सब कुछ महंगा हो गया है। समय के अनुसार जो महंगाई होती है उसके अनुसार सरकार को कुकिंग कन्वर्जन राशि बढ़ानी चाहिए, ताकि मीनू के अनुसार सब कुछ गुणवत्ता युक्त भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
केशव लाल मीणा, अध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय, झल्लारा