उदयपुर

कम बारिश के बावजूद सराडा़ क्षेत्र में उम्मीदों के सागर लबालब

पौने दो किलोमीटर लंबी सुरंग से तालाबों को भर रही पारेई नदी महत्वाकांक्षी जल योजना का हजारों लोगों को मिल रहा फायदा

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Sep 13, 2023
कम बारिश के बावजूद सराडा़ क्षेत्र में उम्मीदों के सागर लबालब

उदयपुर.. परसाद . एक ओर जहां जग प्रसिद्ध जयसमंद झील, डायाबांध, अदवास और सेमारी तालाब अभी खाली है ,वहीं सराडा़ क्षेत्र के तीन तालाब थूरघाटी, केजड और हरचन्द ओवरफ्लो चल रहे हैं। क्योंकि परसाद के समीप पारेई नदी पर बने देवेन्द्र एनिकट के पानी को पहाड के नीचे सुरंग बनाकर नाले में डाला जा रहा है, जो पहले गरगल नदी में मिलकर थूरघाटी तालाब में गिरता है,इसके बाद केजड और हरचन्द में पहुंचता है, जो आगे जाकर सेकडी गांव के समीप जयसमन्द झील की गोमती नदी में मिलकर सोम कमला आम्बा बांध में जाता है ।

43.84 करोड की लागत से हुआ एनिकट व सुरंग का निर्माण10 सितंबर, 2013 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परसाद के समीप पारेई नदी पर देवेन्द्र एनिकट का शिलान्यास किया था। 43.84 करोड की लागत की यह महत्वाकांक्षी परियोजना सराडा क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। इसकी जल भराव क्षमता 33.14 क्यूबिक है, एनिकट के ओवरफ्लो की लम्बाई 140 मीटर व एनिकट की ऊंचाई 8.92 मीटर है। वर्ष 2017 में निर्माण पूरा होने के बाद भुआलिया पहाड में 1.8 किलोमीटर लम्बी सुरंग बनाकर पारेई नदी के 496 क्यूसेक पानी को सुरंग से जल अपवर्तन के जरिये खरबर पंचायत के पचोकड के समीप निकाला गया, जहां से पानी नाले में होता हुआ थूरघाटी(चावण्ड तालाब) पहुंचता है। यह तालाब लबालब होने के बाद ओवरफ्लो पानी से केजड के प्रताप सागर व हरचन्द तालाब को भरता है ।

कंट्रोल ब्लास्ट से खोदी गई सुरंगदेवेन्द्र एनिकट से पानी भुआलिया पहाड के दूसरी तरफ निकालने के लिए सुरंग बनाने में कंट्रोल ब्लास्ट किए गए। 20 इंजीनियरों की टीम के साथ 100 से अधिक मजदूरों ने इसके निर्माण में अपना पसीना बहाया । इस सुरंग को खोदने के लिए तकनीकी दक्ष टीम ने 1600 कंट्रोल ब्लास्ट किए। अन्तिम ब्लास्ट अधिकारियों की मौजूदगी में तत्कालीन सांसद व विधायक से करवाया गया ।

चावण्ड, केजड और हरचन्द हर वर्ष हो रहे लबालब

एनिकट से सुरंग निर्माण के बाद से ही लगातार तीनों तालाब कम बारिश में भी हर साल भर जाते हैं । 105 एमसीएफटी भराव क्षमता वाले चावण्ड तालाब से आधा दर्जन गांवों की 316 हैक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है ,वहींं 224 एमसीएफटी भराव क्षमता वाले केजड तालाब से 768 हेक्टेयर और सर्वाधिक हरचन्द तालाब से 966 हेक्टयर, कुल 2 हजार हेक्टेयर से भी अधिक कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति हो जाती है ।

टनल से निकलेगी दाईं केनाल, सर्वे पूरा, टेण्डर फाइनलदेवेन्द्र एनिकट की इस सुरंग के खरबर के पचोकड फला से दाईं तरफ एक नई केनाल तैयार की जाएगी, जिसका सर्वे पूरा हो चुका है । इस केनाल से पानी सराडा़ व सेमारी क्षेत्र की छह से अधिक पंचायतों के दर्जनों गांवों तक पहुंचाने की योजना है, जिसके दो रूट तैयार किए जा रहे है, इसमें पहला रूट इस पानी को केनाल के जरिये खरबर (अ) पंचायत के जंजीला तालाब में डाला जाएगा, इसके बाद ओवरफ्लो पानी को निंबोदा पंचायत के बंजारी तालाब, जटिला तालाब होते हुए सेपुर, पाल सेपुर के खजुरिया तालाब से सराडा के भुआरा व लालर तालाबों और पाल सराडा, कछोटा के हसुला तालाब में डाला जाएगा, इसके बाद जो ओवरफ्लो पानी होगा वो नीमच के नाले से गरगल नदी से होते हुए हरचन्द तालाब में पहुंचेगा ।

इसके साथ ही दूसरा रूट बलुआ के नाले से होते हुए धनकावाडा के एनिकट में पानी डाला जाएगा, जो सदकडी तालाब से होते हुए सेमारी तालाब पहुंचेगा।

हजारों लोगो को मिलेगा लाभदेवेन्द्र एनिकट सराडा व सेमारी क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। इस महत्वांकाक्षी योजना का पानी पहुंचने से सराडा की सात पंचायतों के हजारों लोगों को लाभ मिल रहा है, वहीं दाईं केनाल शुरू होने से सराडा व सेमारी दोनों उपखंडों की छह से अधिक पंचायतों के लगभग चार लाख से अधिक की आबादी को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। सोलर आधारित डायवर्जन वाली इस परियोजना की अनुमानित लागत 1662. 50लाख रुपए प्रस्तावित है। सर्वे पूरा होकर इसके लिए टेंडर फाइनल हो चुके हैं। इसके तहत देवेन्द्र एनिकट से 22.50 एमसीएफटी पानी को लिफ्ट करके अपवर्तित किया जाएगा ।

भू गर्भीय जलस्तर बढा़सराडा़ तहसील क्षेत्र के पहाडी व पथरीले इलाके में देवेन्द्र एनिकट से चावण्ड, केजड व हरचन्द तालाब लगातार भरे रहने से वाटर रिचार्जिंग होने से भू गर्भीय जल स्तर में बढोतरी हुई है ।तालाबों के निचले स्तर के कुओं व बोरवेल में जल स्तर बढने से किसानों व आमजन के लिए बहुत लाभकारी साबित हुआ है ।

पेयजल व सिंचाई के लिए मिल रहा भरपूर पानीइस संबंध में पूर्व सांसद रघुवीर मीणा ने बताया कि उनके पिता पूर्व विधायक .देवेन्द्र कुमार मीणा का पारेई नदी के अतिरिक्त पानी को सराडा क्षेत्र में पहुंचाने का विजन था, जिसे लेकर वर्ष 2013 में इस जीवनदायिनी योजना का प्रस्ताव बनाकर शुरू करवाया। ये महत्वाकांक्षी योजना आने वाली पीढी के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होगी ।कम बारिश के बाद भी हर साल लगातार चावण्ड,केजड व हरचन्द तालाबों के भरे रहने से सराडा क्षेत्र के कई गांवों के लिए हजारों लोगों को पेयजल व सैकडों किसानों को सिंचाई केलिए भरपूर पानी उपलब्ध हो रही है ।

इनका कहना है

देवेन्द्र एनिकट से आ रहे पानी से चावण्ड, केजड व हरचन्द तालाबों के लगातार हर साल भरे रहने से अण्डर ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग से भू गर्भीय जल स्तर बढा है । गर्मी के दिनों में हैण्डपंप और कुओं के पानी की समस्या का पहले की अपेक्षा काफी सुधार हुआ है ।रितेश कुमार मीणा, एईएन, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, सराडा

देवेन्द्र एनिकट और सुरंग निर्माण के बाद पहले की अपेक्षा ये तीनों बडे तालाब व कई छोटे बडे एनिकट कम बारिश के बावजूद हर साल ओवरफ्लो हो रहे हैं। पानी की प्रचूरता के चलते क्षेत्र के किसानों को रबी की फसल में सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध हो रहा है, इससे कृषि क्षेत्रफल और पैदावार बढी है ।

धर्मेन्द्र चौबीसा, एईएन , जलसंसाधन विभाग, सराडा

Published on:
13 Sept 2023 01:52 am
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