उदयपुर से गोगुंदा मार्ग में कहीं भी राजतिलक स्थल का बोर्ड तक नहीं पर्यटक इसके इतिहास से बेखबर हल्दीघाटी - कुंभलगढ सर्किट से इसे जोड़ने की दरकार
गोगुंदा . (उदयपुर) . वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप वीरता और अदम्य साहस से दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं, लेकिन उदयपुर जिले के गोगुंदा कस्बे में प्रताप की राजतिलक स्थली वर्तमान में उपेक्षित है। इसके समुचित विकास की दरकार है। महाराणा प्रताप की शौर्य की गाथा में महत्वपूर्ण इस स्थल को इतना गौरव नहीं मिल पाया, जितना मिलना चाहिए था।गोगुंदा में प्राचीन महादेव मंदिर और बावड़ी के निकट महाराणा प्रताप का राजतिलक हुआ था और प्रताप यहीं से महाराणा प्रताप बने। समय के साथ इस स्थल को विकसित करने के प्रयास हुए, लेकिन अपेक्षित विकास नहीं हो सका। इसके लिए जिम्मेदार पर्यटन विभाग भी आंखें मूंदे हुए हैं। हाल यह है कि उदयपुर से गोगुंदा मार्ग में कहीं भी राजतिलक स्थल का संकेतक बोर्ड तक नहीं लगा है। इस कारण उदयपुर से हल्दीघाटी, कुंभलगढ जाने वाले पर्यटकों को इस स्थल की जानकारी नहीं मिल पाती है।
मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना में किया था शामिल
राजतिलक स्थल को विकसित करने के लिए सरकार ने इसे मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना में शामिल कर यहां म्यूजियम, पाथ-वे, ऑडिटोरियम का निर्माण करवाया, लेकिन देखरेख के अभाव में निर्माण कार्य क्षतिग्रस्त हो गए। यहां पार्क भी विकसित किया गया, लेकिन वह भी दुर्दशा का शिकार है। यहां कोई चौकीदार नहीं होने से पूरा परिसर बदहाल हो चुका है। बता दें कि वर्तमान में बजट घोषणा में यहां राणा पूंजा पैनोरमा निर्माण की घोषणा की गई है।
इनका कहना
राजतिलक स्थल महाराणा प्रताप के गौरवशाली इतिहास की नींव है, यहीं से जनता ने राजतिलक कर मेवाड़ को कभी मुगलों के अधीन नहीं रहने का प्रण कर महाराणा प्रताप के साथ हुंकार भरी थी, लेकिन आज इस स्थल के विकास की दरकार है। यहां आने वाले पर्यटक इसके इतिहास से बेखबर हैं। हल्दीघाटी- कुंभलगढ सर्किट से इसे जोड़ने की आवश्यकता है ।
करणसिंह झाला पूर्व सरपंच, गोगुंदा
मुख्यमंत्री ने उदयपुर प्रवास के दौरान प्रताप समाधि स्थल व स्मारक स्थल चावण्ड, राजतिलक स्थली गोगुंदा के लिए 5 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न विकास करवाए जाने की घोषणा की थी। आगामी सप्ताह पर्यटन विभाग व पीडब्ल्यूडी की टीम इन स्थलाें का सर्वे करेगी व एस्टीमेट तैयार करके जयपुर भेजेगी।
शिखा सक्सेना, उपनिदेशक, पर्यटन विभाग