17 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सुविवि में कुलपति चेते तब चम्पाबाग की जमीन पर हो गए कई कब्जे

सुविवि में कुलपति चेते तब चम्पाबाग की जमीन पर हो गए कई कब्जे
3 min read
Google source verification
सुविवि में कुलपति चेते तब चम्पाबाग की जमीन पर हो गए कई कब्जे

सुविवि में कुलपति चेते तब चम्पाबाग की जमीन पर हो गए कई कब्जे

मोहम्मद इलियास/उदयपुर
चम्पाबाग में विश्वविद्यालय के स्वामित्व वाली 14.59 हेक्टर बेशकीमती जमीन का विवाद सुविवि के कई कुलपतियों के कार्यकाल में भी चला लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं किया। वर्तमान कुलपति अमेरिका सिंह ने ध्यान लगाया तब तक इस पर कई कब्जे हो गए और अभी भी मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कुलपति ने हाइकोर्ट के स्टे व राज्यपाल के आदेश के बावजूद अभी भी वहां रात के समय चोरी छिपे निर्माण कार्य होने पर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने निगम अधिकारियों से पूछा कि मामला न्यायालय विचारधीन होने व स्टे होने के बावजूद वहां पर निर्माण कार्य क्यों कैसे जारी है।
इधर, निगम अधिकारियों का कहना था कि राज्यपाल के आदेश के बाद मौके पर चल रहे निर्माण कार्यो को तत्काल प्रभाव से रुकवाते हुए काबिज लोगों को नोटिस थमाया था। गौरतलब है कि राज्यपाल ने गत 3 अगस्त को कलक्टर व नगर निगम को चंपाबाग में अवैध निर्माण रुकवाने के साथ ही तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। आदेश की पालना में निगम ने वहां पर निर्माण कार्य रुकवाते हुए काबिज लोगों को नोटिस थमाया था। कुलपति प्रोफेसर अमेरिका सिंह ने सोमवार जमीन के निरीक्षण के बाद उन्होंने वहां पर रात के समय निर्माण कार्य जारी होना बताते हुए कुलसचिव को अवगत करवाते हुए जिला प्रशासन, यूआईटी व नगर निगम को पत्र लिखने का आदेश दिया। विश्वविद्यालय के अनुसार चंपाबाग की 14.59 हेक्टर जमीन विश्वविद्यालय के नाम आवंटित है लेकिन मामला कोर्ट में लंबित होने से कोई निर्णय नहीं हो पाया।
--
कुलपति ने पूछा-मालिकों द्वारा कब्जा तो किसने दिया बताए निगम
कुलपति अमेरिका सिंह ने पत्र में बताया कि स्थानीय लोगों से वार्ता के बाद यह पाया गया कि मौके पर मनोज राठौड़, जी.एस.टांक, अर्पित लोढ़ा, अजय मूर्डिया, खूबीलाल बोगरिया, नीरज चौधरी तथा सुरेश चित्तौड़ा द्वारा अवैध कार्य रात में कराया जा रहा है। उन्होंने कुलसचिव के माध्यम से यूआईटी, महापौर से पत्र लिखकर पूछा अगर काबिज लोगों के पास कब्जा है तो स्पष्ट करें कि ये कब्जा भू-माफिया, यूआईटी, नगर निगम, विश्वविद्यालय, राज्य सरकार तथा न्यायालय के आदेश किसके द्वारा दिया गया है। क्योंकि रजिस्ट्री, बिजली कनेक्शन, फायर एनओसी दस्तावेज विश्वविद्यालय के पास नहीं है।
--
सुविवि चेता तब तक हो गए अवैध निर्माण
- विश्वविद्यालय के अनुसार चम्पाबाग भूमि मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय उदयपुर के विकास के लिए अवाप्ति की जानी थी। भूमि अवाप्ति के लिए धारा-4 की अधिसूचना 3 अक्टूबर 1981 को जारी की गई।
- भूमि अवाप्ति के लिए धारा-17 की अधिसूचना 29 सितम्बर 1994 को जारी की गई।
- हित धारकों ने उच्चन्यायालय में सिविल रिट पिटीशन दायर की। 10 अप्रेल 2007 को रिटों को निस्तारण होकर न्यायालय ने भूूमि अवाप्ति कारवाई पर स्थगन आदेश दिया। निर्णय मे धारा 17 निरस्त कर धारा 5 (ए) की कार्रवाई करने के लिए एसडीओ गिर्वा को निर्देशित किया गया।
उच्च न्याायलय के निर्णय के खिलाफ 10 अप्रेल 2007 के विरुद्ध विश्वविद्यालय ने डबल बैंच में अपील की। उच्च न्यायालय ने 5 मार्च 2008 को अपील स्थगन आदेश पारित कर समस्त भूमि अवाप्ति कार्रवाई पर रोक लगा दी।
वर्तमान में चम्पाबाग हस्तीमाता रोड व चम्पाबाग भूमि पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। चम्पाबाग भूमि पर हाइकोर्ट का स्थगन आदेश है। अत: निर्माण न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।
--
यह जनहित से जुड़ा हुआ मुद्दा है। यह यह विश्वविद्यालय की जमीन है, इसको लेकर हम लड़ रहे है। जमीन आते है हम वल्र्ड क्लास यूनिवर्सिटी में शामिल हो जाएगें।
अमेरिका सिंह, कुलपति मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय
--
मैं किसी भी कीमत में अवैध निर्माण के पक्षधर नहीं हूं, हमने राज्यपाल व कलक्टर के निर्देशानुसार मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवाते हुए उन्हें नोटिस दिए। मामला हाइकोर्ट में लंबित है, न्यायालय का जो निर्णय होगा उसकी अक्षरत: पालना की जाएगी।
पारस सिंघवी, उपमहापौर