भगवान की रथयात्रा निकाली
उदयपुर. श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के अंतिम दिन ध्यान व आशीर्वाद सभा, श्री जिनाभिषेक एवं नित्यार्चन, मोक्षकल्याणक दृश्य का आयोजन किया गया। आचार्य वर्धमान सागर ससंघ के सानिध्य में अग्निदेव द्वारा सत्कार विधि, मोक्ष कल्याणक पूजा, हवन, पूर्णाहुति की गई।
धर्मसभा में आचार्य ने कहा कि जैन धर्म की महिमा बहुत है भगवान की आत्मा भी हमारी आत्मा जैसी है। उन्होंने भी संसार में परिभ्रमण किया। संसार परिभ्रमण में मिथ्यात्व को नष्ट कर सम्यक दर्शन प्राप्त किया। सम्यक दर्शन से केवल ज्ञान प्राप्त कर जितनी आयु शेष थी, तब तक भगवान भी संसारी रहे। अब मोक्ष कल्याणक के दिन कर्म बंधन से मुक्त होकर भगवान की आत्मा परमात्मा हो गई है। आचार्य ने बताया कि प्रवचन में बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का समापन श्री आदिनाथ भगवान के मोक्ष जाने से हो गया। उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। 5 दिनों के नाटकीय दृश्य से चिंतन, मनन कर व्रत संयम का मार्ग अपनाना चाहिए। इसे कार्य में परिणित कर आत्मा की उन्नति का पुरुषार्थ संयम धारण कर कर सकते हैं। उदयपुर वालों को संघ समागम के उपहार को सौभाग्य में बदल कर मानव जीवन सार्थक करना चाहिए।ब्रह्मचारी गजू भैय्या, राजेश पंचोलिया ने बताया कि वेदी में भगवान को विराजमान, कलशारोहण, मंदिर के शिखरों पर ध्वजा परिवर्तन कर ध्वजारोहण किया गया। भगवान को रथयात्रा के माध्यम से श्री आदिनाथ जिनालय दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर-11 लाया गया। संघ सानिध्य में प्रतिमाएं सौभाग्यशाली परिवार द्वारा विराजित कर अभिषेक किया गया। दोपहर को विसर्जन के साथ महोत्सव का समापन हुआ।