- गुलाब बाग और मेवाड़ जैव विविधता पार्क में शुरू की थी ट्री थैरेपी
उदयपुर. जापान की ट्री थैरेपी पद्धति को विश्व में कई जगह अपनाया गया है। इससे लोगों को स्वास्थ्य लाभ होने के साथ ही प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरुकता पैदा होती है। इसी थैरेपी की शुरुआत वन विभाग ने गुलाब बाग और मेवाड़ जैव विविधता पार्क में करीब छह साल पूर्व की थी, लेकिन वक्त के साथ गिनती के लोग ही इस थैरेपी का लाभ ले रहे हैं।
शहर के गुलाबबाग में करीब छह साल पहले वन विभाग की ओर से इस थैरेपी को शुरू किया गया था। इसे शुरू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य लाभ देने के साथ ही प्रकृति के प्रति लगाव पैदा करना था, लेकिन वक्त के साथ यह थैरेपी बंद हो गई। अब गिनती के लोग ही इसका उपयोग कर रहे है। अंबेरी िस्थत मेवाड़ जैव विविधता पार्क में भी इस थैरेपी को शुरू किया गया था। वहां आज भी बोर्ड लगा है। रुचि रखने वाले पर्यटकाें को वनकर्मी पंकज खटीक और संतोष भाटी इस थैरेपी के बारे में जानकारी देतीं है।
ऐसे होती है ट्री थैरेपी
शांत वनाें में सुबह-शाम नंगे पैर पैदल चलना, वनों से उत्पन्न प्राकृतिक आवाज को सुनना, वनों, वृक्षों की प्राकृतिक गंध, हवा को महसूस करना, वृक्षों को बाहों में लेकर कंपन महसूस करना, वृक्षों के नीचे बैठना, निंद्रा लेना आदि। इस प्रकार के कार्यों से अनोखी जादुइ ऊर्जा को महसूस किया जाता है।
यह लाभ होता है
इस थैरेपी से मानसिक तनाव कम होता है, रक्तचाप कम होता है, अवसाद कम होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ती है, अंदरुनी शांति और हल्कापन महसूस होने के साथ ही निरोगी काया बनी रहती है।
पेड़ों से नजदीकी से पॉजिटिव एनर्जी का संचार
पूर्व उपवन संरक्षक ओपी शर्मा ने बताया कि यह थैरेपी जापान की है। इसे साइंटिस भी मानते हैं। पेड़ पर होने वाले फंगस, बैक्टीरिया आदि का उपचार स्वयं पेड़ ही करते हैं। कुछ पेड़ हजारों साल तक जीवित रहते हैं। पेड़ों को गले लगाने, उनके आसपास रहने से मनुष्य पर भी इसका असर होता है। पॉजिटिव ऊर्जा का संचार होता है। कई बीमारियां भी दूर होती है और पेड़ों, प्रकृति के प्रति मनुष्य का लगाव भी बढ़ता है। इसी सोच के साथ हमने ट्री थैरेपी की शुरुआत की थी।