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‘या हुसैन… या हुसैन… मेरे हुसैन तुझ पर लाखों सलाम’

‘या हुसैन... या हुसैन... मेरे हुसैन तुझ पर लाखों सलाम’

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‘या हुसैन... या हुसैन... मेरे हुसैन तुझ पर लाखों सलाम’

‘या हुसैन... या हुसैन... मेरे हुसैन तुझ पर लाखों सलाम’

मोहम्मद इलियास/उदयपुर
पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सहाब के नवासे हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 जानिसारों की कर्बला में शहादत पर मुस्लिम समाज गुरुवार शुक्रवार को यौमे आशूरा मनाएगा। कोविड गाइड लाइन की पालना में इस बार भी ताजिये नहीं बनाए गए। पलटन, अलीपुरा व धोलीबावड़ी मस्जिदों में गुंबद व खंड को जियारत के लिए मस्जिदों में ही रखा गया है। मुहर्रम की नवीं शब कत्ल की रात पर गुरुवार शाम को कुछ समय के लिए लोग गुंबद की जियारत कर पाएंगें।
गौरतलब है कि कोरोना के चलते पिछले दो साल से ताजियों की सवारी नहीं निकल रही है। उदयपुर में सुबह व शाम को लाइसेंसी ताजियों के साथ 40 ताजियों की सवारी निकाली जाती है। इनमें अलीपुरा, धोलीबावड़ी व पलटन मस्जिद के सबसे बड़े ताजिये शामिल होते है। इस बाद तीनों ही जगह पर गुंबद को मस्जिदों में जियारत के लिए रखा गया है।
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यूं मनाते है मुहर्रम
कर्बला की सरजमीं पर हजारों साल पूर्व हजरत इमाम हुसैन व यजीद की फौजें आमने-सामने हुई थी। यह जंग सच्चाई के लिए हुई। मुहर्रम माह की दसवीं तारीख को जंग में इमाम हुसैन शहीद हुए थे। इसी दस तारीख को मुहर्रम मनाया जाता है।
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क्या होती है मेंहदी
लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर मेहन्दी (मन्नत) के ताजिये बनाते है। अधिकांश ये ताजिये सुबह के समय लाइसेंसी ताजिये के साथ निकलते है।
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सलामी की रस्म भी नहीं होगी
मेवाड़ रियासत में मेवाफरोशान व नायकों के बीच भाईचारा व मुहब्बत को बढ़ावा देने के लिए बरसों पहले शुरु की गई सलामी की रस्म इस साल भी नहीं होगी। प्रतिवर्ष मेवाफरोशान के ताजिये व नायकों की छड़ी की कमल गली में सलामी की रस्म होती है। इस रस्म को देखने हजारो को हुजूम उमड़ता है।
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दो माह यूथ की टीम फिर तैयार होता है ताजिया
. ईदुलजुहा के बाद मोहल्लों के ही 20-25 लोगों की टीम ताजिया बनाने में जुटती है।
्. बड़े ताजिये में गुंबद, खंड के बनाने के साथ ही कलात्मक कारीगरी की जाती है।
. मोहल्ले की यूथ टीम रात में काम कर दो माह में तैयार करती है।
. एक बड़े ताजिये पर कुल खर्च 45-50 हजार रुपए आता है।
. सभी ताजिये के खंडों व गुम्बद को तीज के चौक में लाकर जोड़ा जाता है।
. यहां से शाम की सवारी निकलती है।
- सुबह व शाम की सवारी में कुल 40 ताजिये निकलते है।
- लाइसेंसी ताजियों के साथ मेंहदी (मन्नत) के ताजिये भी निकाले जाते है।
- बड़े ताजिये के 32 फीट का लाइसेंस है।
- शहर में अधिकतम 25 से 35 फीट के ताजिये बनाए जाते है।
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़1-धोलीबावड़ी-14 नम्बर
बड़े ताजिये में छोटे ताजियों के साथ सबसे आगे चलता है। धोलीबावड़ी सदर शकील खां ने बताया कि पिछले दो साल सिर्फ 5 फीट की गुंबद ही बनाई जा रही है। जिसे जियारत के लिए मस्जिद में ही रखा गया है।
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2- कारवाड़ी-भूतमहल अब्बाजी का मोहर्रम-18 नम्बर
यह ताजिया धोलीबावड़ी के बाद छोटे ताजिये के बीच में चलता है। पलटन मस्जिद ताजिया सदस्य इजहार हुसैन ने बताया किशनपोल में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इस कारवाड़ी में जियारत के लिए रखा जाता है।
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3- अलीपुरा- 19 नम्बर
करीब 25 फीट ऊंचाई का यह ताजिया शाम की सवारी में बीचोंबीच चलता है। दो साल से सिर्फ गुंबद व रोजा बनाकर उसके मस्जिद में ही मुकाम पर रखा जा रहा है। अलीपुरा पूर्व सदर मोहम्मद रईसकरीब 5-5 फीट बने गुंबद व रोजा की जियारत के लिए लोग आ रहे है।
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4- पलटन-20
यह ताजिया सबसे बड़ा होकर सबसे अंतिम में चलता है। मुहर्रम की नवमीं पर इसे जियारत के लिए पलटन मस्जिद पर रखा जाता है लेकिन दो साल से गुबद ही बनाई जा रही है। पलटन मस्जिमद सेकेट्री मोहम्मद रियाज हुसैन ने बताया कि जियारत के लिए कोविड गाइड लाइन की पूरी पालना की गई है।
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अलीपुरा बीच
पूर्व सदर मोहम्मद रईस
अलीपुरा- 20-22 फीट का रहने वाला। दो साल से गुम्बद बन रही है। इस बार एक रोजा और एक गुम्बद-5-5 फीट- खर्चा 20-25 में बकराइद के बाद।
अलीपुरा-19, जियारत के लिए वहीं रखा है।
मेहन्दी मन्नत मांगते है...बनाकर बड़े ताजिये के साथ बांध देते है।
सुबह व शाम की सवारी मेंं 40 ताजिये।
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