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वाह रे निगम … जिम्मेदारी नहीं निभाई, कोर्ट के डंडे पर सुनवाई

वाह रे निगम ... जिम्मेदारी नहीं निभाई, कोर्ट के डंडे पर सुनवाई

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मोहम्मद इलियास/उदयपुर

नगर निगम में आमजन की सुनवाई कितनी त्वरित होती है, इसकी नजीर कोर्ट में आने वाले मामलों में देखी जा सकती है। घर के बाहर लगा पोल हटाने में निगम ने परिवादी को एक साल तक टरका दिया और कोर्ट में जाते ही मामला चंद घंटे में निपट गया। इसी तरह दो मंजिला भवन अतिरिक्त बनाते ही निगम ने काम रोका तो मामला 12 साल तक कोर्ट में चला और बाद में समझौते के तहत उसे रेगुलाइज कर दिया गया। जबकि यह काम निगम स्तर पर ही किया जा सकता था।

लोक अदालत ने निपटाए 24 प्रकरण
इसी तरह साफ-सफाई, अतिक्रमण व चालान के मामले भी निगम की उदासीनता से कोर्ट में पहुंचे तो एक बार लोक अदालत की टीम भी चौंक पड़ी। लोक अदालत ने निगम की विधि अधिकारी दीपिका मेनारिया, उपनगर नियोजक सिराजद्दीन, अधिशासी अभियंता रितेश पाटीदार, स्वास्थ्य निरीक्षक नरेंद्र श्रीमाली, पेनल अधिवक्ता महेन्द्र ओझा, सहायक अधिवक्ता मुकुंद श्रीमाली, राजेंद्र सिंह राठौड़, विधि शाखा अध्यक्ष सोनिका जैन की मौजूदगी में 24 मामलों को हाथोंहाथ निपटाया।

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देखिए कैसे-कैसे मामले कोर्ट में

केस-1

एक साल से नहीं हटा पाए पोल

मालदास स्ट्रीट में एक घर के बाहर पोल पर ट्रांसफार्मर लगा था, इसको लेकर बार-बार परेशानी होने पर लोगों ने इसे हटाने के लिए निगम को परिवाद किया। कई बार आग्रह किया, लेकिन उसे नहीं हटाया। परिवादी ने कोर्ट में वाद दायर किया, नोटिस मिलते ही निगम ने सुनवाई से पहले ही पोल हटा दिया।

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केस-2

मकान को रेगुलाइज्ड करने पर 12 साल लगा दिए

वर्ष 2011 में एक व्यक्ति ने अवैध रूप से दो मंजिला अतिरिक्त भवन बना दिया। निगम ने उसे रोका तो वह कोर्ट में चला गया। मामला 12 साल तक लंबित होने पर निगम ने उसके विरुद्ध कार्रवाई के बजाए उससे राशि लेकर भवन को रेगुलाइज कर दिया। जबकि यह मामला नए नियमों के तहत निगम स्तर पर निपटाया जा सकता था।

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केस-3

सफाई भी नहीं करवा सका निगम

अंदरुनी शहर में एक मकान के बाहर साफ सफाई नहीं होने से लोगों ने वहां कार्नर को शौचालय बना दिया। परिवार परेशान होने पर उन्होंने निगम को शिकायत की। कार्रवाई नहीं करने पर परिवार कोर्ट पहुंचा तो निगम ने वहां सफाई कर टाइल्स लगावा दी। इसी तरह अतिक्रमण व स्ट्रीट वेंडर के चालान के मामले भी कोर्ट पहुंचे।

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