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स्वाद और मिठास ने लुभाया, कई राज्यों में रोज जा रही 25 ट्रक मटर

मटर की बिक्री से किसान हो रहे मालामाल, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा को भा रहा रुनीजा के मटर का स्वाद,

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भा रहा रुनीजा के मटर का स्वाद

रुनीजा. सर्दियों में हरी—भरी मटर हर किसी का दिल लुभाती है पर रुनीजा की मटर की बात कुछ अलग ही है. यहां की मटर का स्वाद और इसकी मिठास लाजवाब है और यही कारण है कि अब इसकी देशभर में डिमांड हो रही है.मटर खरीदनेवाले और बेचनेवालों को रुनीजा वर्तमान में सबसे बडा व्यापारिक केंद्र बना हुआ है। यहां से प्रतिदिन गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा आदि राज्यों में 20 से 25 रुपए तक मटर कमीशन एजेंटों द्वारा भेजा जा रहा है। इसके चलते किसानों को भी अच्छे भाव के साथ नगद दाम मिल रहे हैं। साथ ही समय और पैसे की बचत भी हो रही है।

रुनीजा रेल्वे स्टेशन से लगाकर विद्युत मंडल कार्यालय तक कमीशन एजेंट अलग-अलग तोल कांटा लगा कर रुनीजा तथा आसपास के किसानों का मटर खरीद कर अलग-अलग राज्यों में भेज रहे हैं। यहां किसानों से 32 से 35 रुपए किलो में मटर खरीद रहे हैं और प्रतिदिन चार से पांच गाड़ी मटर महाराष्ट्र अलग-अलग जिलों में भेजे जा रहे हैं। इसी प्रकार से अन्य राज्यों को भी मटर भेजा जा रहा है. यह मटर महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे, बेलगांव के साथ गोवा और गुजरात के सूरत, वापी, अहमदाबाद, राजकोट भी जा रहा है।

यहां का मटर विशिष्ट वैरायटी का माना जाता है. इसका स्वाद भी अनोखा है जिसमें कुछ अलग ही मिठास है. एजेंट मटर की खास किस्म के लिए किसानोें को 40 से 42 रु. किलो के भाव में नगद भुगतान कर रहे हैं। रुनीजा के साथ गजनी खेड़ी ,माधवपुरा, खेड़ावदा, मालगावड़ी, बड़गांवा, बालोदा लक्खा, सुन्दराबाद , काछिबडोदा आदि गांवों के किसान मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर ,पिक अप, बैलगाड़ी, साइकिल से मटर लाकर कमीशन एजेंटों को बेच रहे हैं।

किसानों को मिल रहा दोहरा लाभ
कई किसानों ने बताया कि रुनीजा में मटर बेचने से और अधिक कमीशन एजेंट हो जाने की वजह से कॉम्पीटिशन के चलते मटर के अच्छे भाव मिल रहे हैं। इन व्यापारियों ने शुरुआत में 60 से 80 रु. किलो तक भी मटर खरीदी थी. इससे हमें दोहरा लाभ हो रहा है. एक तो पैसा नगद मिल रहा है और साथ ही रतलाम, उज्जैन, या अन्य मंडियों में जाना नहीं पड रहा है. इससे समय और पैसा दोनों बच रहा है. इतना ही नहीं, यहां मटर खरीदी केंद्र होने से रुनीजा,माधोपुर तथा आसपास के कई युवाओं को भी रोजगार मिल गया है. ये युवा हम्माली कर रोज 400 से 500 रु कमा रहे हैं। वहीं कट्टी व्यापारी, किराना, रेस्टोरेंट मालिक को भी फायदा मिल रहा है।

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