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एक आश्रम, जो दिखा रहा बेड़िया लड़कियों को नई राह

मध्यप्रदेश में स्थित एक आश्रम वेश्यावृत्ति के लिए कुख्यात माने जाने वाले बेड़िया समाज की लड़कियों को नई राह दिखाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है

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Abhishek Srivastav

Sep 28, 2015

abhudaya ashram

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फोटो : यूनिवार्ता के दौरान अरूणा छारी
उज्जैन। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले स्थित एक आश्रम वेश्यावृत्ति के लिए कुख्यात माने जाने वाले बेडिया समाज की लड़कियों को नई राह दिखाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

मुरैना जिला मुख्यालय स्थित इस अभ्युदय आश्रम के संचालक रामस्नेही छारी के निधन को पिछले दिनों दो साल पूरे हो गए। उनके निधन के दो वर्ष बाद भी आश्रम उसी उत्साह से संचालित है, जितना इसकी स्थापना के समय था। इस आश्रम में आज भी बेड़िया समाज के 200 से अधिक बच्चे और बच्चियाँ प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च स्तर तक की शिक्षा प्राप्त कर रहे है।

अभ्युदय आश्रम की संचालिका श्रीमती अरूणा छारी ने आज यहां यूनिवार्ता को बताया कि आश्रम के संस्थापक श्री छारी ने इसकी स्थापना बेड़िया समाज में पारम्परिक वेश्यावृत्ति जैसे कुप्रथा का उन्मूलन करने के उद्देश्य से सन् 1992 में की थी। जब इस आश्रम की स्थापना की गई थी, तब वेश्यावृत्ति से जुडे बेड़िया समाज के उन लोगों ने जमकर विरोध किया था।

यहां तक कि उन दिनों आश्रम के संस्थापक की हत्या करने वाले को एक लाख रूपए का इनाम भी घोषित किया गया था। श्रीमती छारी के मुताबिक आश्रम में शिक्षा प्राप्त करने के बाद अब तक 250 से ज्यादा लड़के-लड़कियां समाज की मुख्य धारा से जुड़कर सरकारी-गैर सरकारी संस्थाओ में सेवारत हैं। वहीं लगभग पचास लड़के लड़कियां अपनी शादी कर घर बसा चुके हैं। आश्रम में इस समय समाज के 111 लड़के और 109 लड़कियां हैं, जो देश के विभिन्न राज्यों से हैं।

उन्होंने बताया कि हाईस्कूल तक शिक्षा आश्रम में ही दी जाती है और इसके बाद केवल लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिये बाहर महाविद्यालयों में दाखिला दिलाया जाता है। उनकी पूरी देखभाल की जिम्मेदारी आश्रम करता है। सूत्रों के मुताबिक कई बार मध्यप्रदेश सरकार से समय पर अनुदान नहीं मिल पाने पर श्रीमती छारी अपने जेवर गिरवी रख कर या बाजार से उधार लेकर बच्चों का पालन पोषण करतीं हैं।

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